शीला दीक्षित ने भी की प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ

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कांग्रेस दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और दिल्ली कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपने एक बयान से कांग्रेस ने खलबली मचा दी है. बृहस्पतिवार को एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने स्वीकार करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह आतंकवाद से लड़ने में उतने कठोर नहीं थे, जितना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं.

शीला दीक्षित अकसर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहती है. 2017 में भी शीला दीक्षित ने राहुल गाँधी को अपरिपक्व यानी Immature बता दिया था और कहा था कि राहुल को अभी और समय चाहिए.
शीला दीक्षित के बृहस्पतिवार को दिए इस बयान ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है. ऐसा इसीलिए क्योंकि एक तरफ गाँधी परिवार का नाम मीडिया के माध्यम से जमीन घोटाले में आ रहा है वही दूसरी और पुलवामा हमले के बाद कांग्रेस पार्टी एक ऐसा माहौल बनाने का प्रयास कर रही थी जैसे प्रधानमंत्री मोदी आतंकवाद पर उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

हालाँकि, शीला दीक्षित ने यह भी कहा है कि नरेंद्र मोदी के ज्यादातर काम राजनीति से प्रेरित होने के साथ ही राजनीतिक लाभ उठाने के लिए होते हैं। इसके आगे शीला दीक्षित अपनी सफाई में कहती हैं, “मनमोहन सिंह ने आतंकवाद को लेकर उतना कड़ा कदम नहीं उठाया, जितना कि पीएम मोदी उठाते हैं। अगर मेरे बयान को किसी दूसरी तरह पेश किया जा रहा है तो मैं कुछ नहीं कह सकती।”

दरअसल नवंबर 2008 में मुंबई में करीब आठ जगहों पर आतंकी संगठन लश्कर ए तय्यबा ने हमला कर दिया था. ये भारतीय इतिहास का एक बहुत बड़ा आतंकी हमला था जिसमें करीब 174 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे. पूरे देश में रोष था लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई नहीं की थी. एक टीवी इंटरव्यू में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछा गया कि भारत ने मुंबई हमलों के बाद अभूतपूर्व संयम क्यों दिखाया तो मनमोहन सिंह ने जवाब दिया था कि मुंबई हमले के बाद मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव था लेकिन मैंने दबाव को सहा और ये फैसला लिया कि पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो. और आज में कह सकता हूँ कि वो फैसला ठीक फैसला था.

लेकिन वही पुलवामा हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये साफ़ कर दिया था कि उन्होंने सेना को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी है जिससे सेना आतंकवादियों पर अपने हिसाब से कार्रवाई करें.दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से ही आक्रामक तरीके से आतंकवादियों और अराजक तत्वों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है. कश्मीर घाटी में पाकिस्तान समर्थन प्राप्त अलगावादी नेताओं के खिलाफ सरकारी एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं. जिसके चलते कई अलगावादी नेता गिरफ्तार हो चुके हैं.

वही ऑपरेशन आल out के अंतर्गत सेना कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों का खात्मा करने में जुटी हुई है. इस ऑपरेशन में सेना को काफी सफलता भी मिली है. गौर करने कि बात यह है कि बीते वर्ष 2018 में जम्मू कश्मीर के अंदर 223 आतंकवादियों को सेना ने मार गिराया था जो कि पिछले आठ सालों का सबसे बड़ा आकड़ा था.

इसके बाद ऊरी हमले के बाद सितम्बर 2016 में भारत ने POK में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकवादियों को भरी नुकसान पहुँचाया था. फिर 26 फ़रवरी को पुलवामा आतंकी हमले के बाद जो एयर स्ट्राइक हुई उसे तो आप और हम जानते ही हैं. इस हमले के बाद भारत पाकिस्तान को विश्व में अलग थलग करने में भी कामयाब रहा.

मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए यु एन सिक्यूरिटी काउंसिल में भी 15 में से 13 सदस्यों ने भारत का साथ दिया. ये अपने आप में अभूतपूर्व था क्योंकि आज से पहले इतना समर्थन भारत को यु एन में कभी नहीं मिला था.

तो इन तथ्यों से साफ़ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत सख्ती से आतंकवाद को चोट पहुंचाई है. और देश कि सुरक्षा को सुनिश्चित किया है. इस बात को आखिर में कांग्रेस कि वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने भी मान लिया है. लोक सभा चुनाव 2019 से बिलकुल पहले शीला दीक्षित का ये बयान कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचा सकता है