क्या इस चाल से बच पायेंगे शरद पवार? खुद ही ईडी के सामने हो गये हाजिर

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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम है शरद पवार.. राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार दोनों पर राज कर चुके हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके शरद पवार के पास राजनीति का लंबा अनुभव है लेकिन अब शरद पवार पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है. एमएससीबी बैंक घोटाला केस मेँ शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ FIR के बाद उनके भतीजे अजित पवार समेत कई एनसीपी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसने के बाद पार्टी की हालत खस्ता होती दिख रही है. महाराष्ट्र की सियासत जबरदस्त करवटें बदल रही है. ये पहली बार हुआ है जब शरद पवार पर इतना बड़ा शिकंजा कसा जा रहा है. एमएससीबी बैंक घोटाले मेँ विधानसभा चुनाव से ऐन पहले एनसीपी नेताओं पर कसता शिकंजा पार्टी की नैय्या डुबो सकता है. महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव घोटाला 2009 से 2011 के बीच में हुआ था. उस वक्त महाराष्ट्र और केंद्र में एनसीपी सत्ता में थी. आरोपों के मुताबिक महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर ने बैंकिंग और आरबीआई के नियमों का उल्लंघन कर अपने करीबियों को करोड़ों रुपए लोन के रूप में बांटे गए. घोटाला करीब 25 हज़ार करोड़ का बताया जा रहा है.

अजित पवार जो उस वक्त महाराष्ट्र के वित्त मंत्री थे और MSCB बैंक के डायरेक्टर भी थे… 2014 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहाण को इस अनियमितता के बारे में पता चला था. 5 साल बाद अब एक याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए और अब एफआईआर दर्ज हो गई है. शरद पवार के साथ ही उनके भतीजे अजित पवार और उनके विश्वासपात्र आनंद राव, जयंत पाटिल के खिलाफ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक स्कैम मामले में ईसीआईआर दर्ज की गई है.. शरद पवार और जयंत पाटिल समेत बैंक के अन्य डायरेक्टर के खिलाफ बैंकिंग और आरबीआई के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है. इन्होंने कथित तौर पर चीनी मिल को कम दरों पर कर्ज दिया था और कर्जा चुकाने में असमर्थ दोषियों की संपत्तियों को कोड़ियों के भाव बेच दिया था.

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में ईडी के शिकंजे में फंसने जा रहे शरद पवार की पार्टी एनसीपी के लिए ये काफी नुकसानदायक जो सकता है. वैसे शरद पवार चक्रव्यूह रचना और भेदना दोनों जानते हैं. इसीलिए शरद पवार ने एक खेल पहले ही खेल दिया है.. आइये आपको बताते हैं.

पहला दरअसल शरद पवार ईदी के सामने पहले ही पेश हो गये जिससे कि वो अपनी धाकड़ छवि लोगों को दिखा सके कि उन्होंने कुछ गलत नही किया है.

दूसरा ये है कि अगर अभी ईडी के सामने पेश हो जाते है तो उन्हें चुनाव के वक्त किसी तरह की परेशानी नही होगी, प्रचार प्रसार करने में किसी तरह की दिक्कत का सामना नही करना पड़ेगा.

तीसरा- शरद पवार इस केस को केंद्र बनाम महाराष्ट्र की लड़ाई बनाना चाहते हैं. दरअसल ऐसा करके वे ये दिखाना चाहते है कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र के बड़े नेताओं को किस तरह परेशान कर रही है, दबाने की कोशिश कर रही है. मतलन कुल मिलाकर विक्टिम कार्ड खेलना चाहते हैं शरद पवार..

लेकिन भैया ईडी में कम नही है.. उसने भी अपना गेम प्लान तैयार कर लिया है. मिली जानकारी के आधार पर आपको तीन प्लान हम बताते है.

पहला- ईडी 27 सितम्बर को शरद पवार से किसी तरह की पूछताछ नही करेगी सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी की जाएगी.

दूसरा- शरद पवार से पूछताछ के लिए ईडी सारे सबूत इक्कठा कर लेना चाहती है. सवालों की लिस्ट तैयार कार ली जाएगी.. मतलब पूरी तैयारी इस लेबल की होगी कि शरद पवार को बचने को कोई मौका न मिले .

तीसरा- भले ही 27 सितम्बर को पेश होने के एलान शरद पवार कर चुके हो लेकिन ईडी उन्हें 15 25 अक्टूबर के बीच में उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है.

हालाँकि शरद पवार इसमें राजनीति देख रहे हैं. शरद पवार का कहना है कि “यदि उन्होंने मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया है, तो मैं इसका स्वागत करता हूं. मैंने उन जिलों में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी है जिनमें मैंने और मेरे पार्टी के सहयोगियों ने दौरा किया है, खासकर युवाओं की प्रतिक्रिया बेजोड़ थी. इसके विपरीत लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद मुझे आश्चर्य होता अगर मेरे खिलाफ कार्रवाई नहीं होती. मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने इस कार्रवाई की शुरुआत की है‘

 वैसे शरद पवार का नाम दाऊद इब्राहिम के साथ भी जुड़ चुका है. सूबे की राजनीति में इसकी शुरुआत पूर्व उप मुख्यमंत्री दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने की थी. दाऊद इब्राहीम और शरद पवार के बीच कथित केमिस्ट्री  का सनसनीखेज आरोप लगाकर बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने साल 1993 मुंबई धमाके के बाद सियासी बवाल खड़ा कर दिया था.

खैर देखने वाली बात होगी कि पूर्व वित्त मंत्री और गृह मंत्री पी चिदम्बरम और डी शिवकुमार के बाद अब पूर्व केन्द्रीय कृषि मंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री और महाराष्ट् के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार पर शिकंजा कसेगा, जेल का दरवाजा खुलेगा! ये तो आने वाले कुछ वक्त में पता चलेगा.