1993 मुंबई ब्लास्ट को लेकर मुख्यमंत्री ने बोला था झूठ कि मस्जिद में भी हुए थे ब्लास्ट

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देश में आम चुनाव की घोषणा के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगों को चौंका दिया। लेकिन बताया जा रहा है कि पवार के इस यू टर्न के पीछे कई सियासी राज छिपे हुए हैं । जिक्र शरद पवार का हुआ तो हमे याद आ गया..1993 मुंबई ब्लास्ट के दौरान का वो दिन जब शरद पवार ने कुछ ऐसा किया था, जो आप सोच भी नहीं सकतें है..शरद पवार ने उस दौरान झूठ बोला था..झूठ भी ऐसा जिसे पढ़ आप दंग रह जाएंगे.. भारत के वरिष्ठतम नेताओं में से एक शरद पवार 1993 बलास्ट के वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हुआ करते थे..उस दौरान पवार ने बम ब्लास्ट्स की संख्या बढ़ा दी थी। दरअसल, 1993 मुंबई ब्लास्टस में 12 धमाके हुए थे वो भी हिन्दू बहुल इलाके में लेकिन शरद पवार ने कहा था कि 13 धमाके हुए है और 13वां धमाका मुस्लिम बहुल इलाके में हुआ हैं।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने हमलों के तुरंत बाद दूरदर्शन स्टूडियो में जाकर बोला था और ऐलान किया था कि कुल 13 धमाके हुए हैं। पवार ने कहा था कि मस्जिद बंदर में 13वाँ विस्फोट हुआ था। लेकिन इस हमले में हिन्दू बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाया गया था, ऐसे में पवार ने मस्जिद में विस्फोट की कहानी गढ़ी ताकि मुस्लिमों को भी पीड़ित की तरह पेश किया जा सके। वास्तव में, सभी 12 धमाके हिन्दू बहुल इलाक़े में किए गए थे।

दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की ‘खोज’ कर ली थी, जो असल में हुआ ही नहीं था। भले ही आपको यह अविश्वसनीय लगे लेकिन यही सच है।

पवार ने दावा किया था कि उनके इस झूठ के लिए उनकी प्रशंसा की गई थी। इस हमले में मुसलमानों को बराबर पीड़ित दिखाने और सच्चाई को दबाने के लिए झूठ का सहारा लिया था। ऐसा स्वयं पवार ने स्वीकार किया था। उन्होंने इसे ‘संतुलन’ के लिए किया गया कोशिश बताया था। हमले के 22 वर्षों बाद पवार ने पुणे में आयोजित 89वीं मराठी साहित्यिक बैठक को सम्बोधित करते हुए इस बात को स्वीकारा था कि उन्होंने जानबूझ कर एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की कहानी गढ़ी थी..ताकि मुस्लिमों को पीड़ित दिखा कर सांप्रदायिक तनाव से बचा जाए.

शरद पवार ने कहा कि उन्होंने दूरदर्शन स्टूडियो जाकर ऐसा कहा क्योंकि यह सांप्रदायिक तनाव की स्थिति को बचाने के लिए सही था। वे लोगों को इस बात का एहसास दिलाना चाहते थे कि मुसलमान भी इस विस्फोट में शिकार हुए हैं। लेकिन यहां सवाल ये है कि 22 वर्षों बाद शरद पवार का किया हुआ ये दावा कितना सही है..आखिरकार क्यूं 22 सालों बाद शरद पवार ने इस बात को स्वीकारा..क्या सच में शरद पवार हिन्दू-मुस्लिमों में दंगा ना भड़के इसलिए बलास्ट की संख्या बढ़ा दी थी…या फिर बात कुछ और ही थी..

बता दें कि ये ऐसा पहला आतंकी हमला था, जब भारत में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया हो। 26/11 की तरह ये हमला भी पहले से नियोजित थे और इन्हें बहुत प्लानिंग के बाद अंजाम दिया गया था। इस हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे, वहीं लगभग 1400 लोग घायल हुए थे। यह भारत में आतंकी हमलों में हुई अब तक की सबसे बड़ी क्षति है। इस घातक आतंकी हमले में शिवसेना दफ़्तर को भी निशाना बनाया गया था। इस धमाके इब्राहिम और टाइगर मेमन था। इसकी पूरी साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी। उस दिन को आज भी ब्लैक फ्राइडे के नाम से जाना जाता है।