सीबीआई के साथ हुई इस हरकत को लेकर पूरे देश में मचा बवाल! ममता की पुलिस की शर्मनाक हरकत

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पश्चिम बंगाल में जो भी कुछ हुआ, जो कुछ भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया वो संविधान की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। दरअसल रविवार की शाम को पश्चिम बंगाल की पुलिस ने सीबीआई के उन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया जो आईपीएस राजीव कुमार से पूछताछ के लिए उनके घर जा रही थी। इसके बाद ममता बनर्जी खुद आईपीएस राजीव कुमार के घर पहुंची और उनके घर पर ही मीटिंग बुलाई और कुछ देर बाद ममता बनर्जी आवास से बाहर आई और फिर प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और सीबीआई समेत अजीत डोभाल पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगया। ममता बनर्जी के इस बयान को सुनकर हंसी आती है क्योंकि यहां ममता बनर्जी संविधान की हत्या की दुहाई देने लगी जबकि वे खुद संबिधान के खिलाफ जाकर सीबीआई के अधिकारियों को पुलिस से गिरफ्तार करवा दिया. पश्चिम बंगाल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सीबीआई के अधिकारीयों को इस तरह गिरफ्तार किया गया है. आप ये वीडियो देखिये और सोचिये कि कैसे ममता बनर्जी तानाशाही रवैये से सीबीआई अधिकारीयों के साथ पुलिस से बदसलूकी करवा रही है इसके बाद हम खोलते हैं ममता बनर्जी के तानाशाही की पूरी पोल!

दरअसल राजीव कुमार जिनसे पूछताछ करने के लिए सीबीआई के अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे थी …उनकी गिनती सीएम ममता बनर्जी के करिबियों में की जाती है. राजीव कुमार 2013 में सारदा चिटफंड घोटाले मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी के प्रमुख थे. इसी बीच उन पर जांच के दौरान गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं. एसआईटी प्रमुख रहते हुए राजीव कुमार ने जम्मू कश्मीर में सारदा के चीफ सुदीप्त सेन गुप्ता और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार तो किया था.लेकिन उनके पास से एक डायरी मिली थी. ऐसा कहा जाता है कि इस डायरी में चिटफंड से रुपये लेने वाले नेताओं के नाम थे. राजीव कुमार पर इसी डायरी को गायब करने आरोप लगा है. कोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई ने राजीव कुमार को आरोपी बनाया था. और कोर्ट के आदेश पर ही सीबीआई राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची जबकि ममता बनर्जी का कहना है कि सीबीआई प्रधानमन्त्री मोदी और केंद्र सरकार के इशारे पर कार्रवाई कर रही है.
यहाँ सबसे हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस केस की जाँच के लिए पशिचम बंगाल के एक कांग्रेसी नेता ने ही कोर्ट में अर्जी दी थी.. जो अब सीबीआई की कार्रवाई पर तिलमिला रही है. ममता बनर्जी के रवैये को देखते हुए सीबीआई ने कोर्ट का रुख किया है. सीबीआई का कहना है कि अधिकारी सिर्फ राजीव कुमार से पूछताछ के लिए गयी थी.
पूछताछ के लिए गये अधिकारीयों को देखकर ममता बनर्जी राजीव कुमार को बचाने के लिए इस तरह दौड़ पड़ी कि लोकतंत्र, संविधान और मुख्यमंत्री पद की गरिमा का कोई ख़याल ही नही रहा…
सीबीआई के अधिकारीयों की गिरफ्तारी, ममता की प्रेस कांफ्रेस के बाद जब यह खबर आग की तरह पूरे देश में फ़ैल गयी तो ममता बनर्जी के अधिकारीयों ने सामने आकर कहा कि उन्हें सिर्फ हिरासत में ही लिया गया था नाकि गिरफ्तार किया था… हालाँकि कुछ देर बार सीबीआई के अधिकारीयों को बंगाल पुलिस ने छोड़ दिया.. लेकिन यह घटना भारत के लोकतंत्र पर किया सबसे बड़ा हमला..माना आ रहा…

एक भ्रष्टाचार के आरोपी को बचाने के लिए एक सूबे की मुख्यमंत्री सीबीआई अधिकारीयों को गिरफ्तार करवा दे.. खुद लोकतंत्र को ताक पर रख दूसरों पर लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगाये… विपक्ष नेताओं को रैली के लिए अनुमति ना दें… विपक्षी कार्यकर्ताओं की ह्त्या पर चुप्पी साध ले… ये कैसा लोकतंत्र हैं?…ये कैसी सरकार है?… ये किसी तानशाही है?…. क्या इस जांच की आंच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुँचने वाले हैं जिससे ममता बनर्जी परेशान हो गयी है.. ऐसा कहा जाता है इस घोटाले में ममता के कुछ करीबियों का नाम भी है शायद ममता की तिलमिलाहट का यही सबसे बड़ा कारण है..
अब ममता बनर्जी सरकार के खिलास धरने पर बैठी हैं… और इस धरने में शामिल होने के लिए उन्होंने देश के कई विपक्षी पार्टियों के नेतओं को न्योता भी भेज दिया है… धरने धर धर के मुख्यमंत्री बने केजरीवाल लोकतंत्र बचाने के लिए दिल्ली से कोलकाता सबसे पहले पहुँच सकते हैं. अब देखने वाली बात तो है कि लोकतंत्र की हत्या करने वाली ममता बनर्जी का साथ देने के लिए कितने लोकतंत्र के पुजारी पहुँचते हैं.