आखिरकार भारतीय NRI पर हमला क्यों बोल रहे हैं भारत के ही कुछ लोग!

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प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ जब एक साथ मंच साझा किया तो पूरी दुनिया के निगाहें टीवी पर टिकी हुई थी.. इस एतिहासिक क्षण का समक्ष गवाह लगभग पचास हजार लोग बने.. जो nrg स्टेडियम में मौजूद थे..जैसे ही दोनों नेता स्टेज पर पहुंचे तो मोदी मोदी और usa usa से पूरा स्टेडियम गूँज उठा.. इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों में भारतीय एनआरआई और अमेरिका में रह रहे हिन्दुस्तानी अधिक थे.. लेकिन इसी कार्यक्रम के बाद अब भारत के कुछ लोग इन्ही एनआरआई भारतीयों के खिलाफ बोलने लगे हैं.. वजह क्या है ये भी अभी थोड़ी देर में ही साफ़ हो जायेगी..इस वीडियो के अंत होते ही….

  खैर अब आपको बताते हैं कि आखिर वो कौन से भारतीय हैं जिन्होंने NRI भारतीयों के खिलाफ बोला है.. उनका मकसद क्या है.. और उनकी पहचान क्या है? दरअसल इस पूरी मुहीम को अगर एक शब्द में पिरोया जाए तो निकलता है प्रोपगेंडा.. जलन… परेशानी… या इस तरह के कुछ ख़ास शब्द..

सबसे पहले बात करते हैं ट्वीट की.. उदाहरण के तौर पर हैशटैग हाउडी मोदी का इस्तेमाल करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा ‘सभी एनआरआई अंध भक्तों के लिए: पहले जब आप 1 डॉलर भारत में भेजते थे तो केवल बदले में 45 रुपए मिलते थे, अब 70 रुपये मिलते हैं। यही तो अच्छे दिनों का सबसे बड़ा उदाहरण है। अगर भारत में इतने ही अच्छे दिन आ गए हैं, तो ये लोग भारत में आकर एंजॉय क्यों नहीं करते?’

इसी तरह ‘हाउडी मोदी’ की शानदार सफलता से एजेंडावादी पत्रकार और अगर मै गलत नही हूँ तो अमित शाह के बेटे जय शाह के कारोबार पर झूठी रिपोर्ट लिखने वाली महान पत्रकार रोहिणी सिंह भी काफी आहत दिखाई दीं.. रोहिणी सिंह ने लिखा ‘राष्ट्रपति ट्रम्प को भी भारतीय समुदाय के लोगों के साथ ठीक ऐसे ही बर्ताव करना चाहिए जिस तरह भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ किया जाता है. क्या यही उचित नहीं होगा?’ भाई यहाँ मैं तो रोहिणी सिंह को सलाम करना चाहता हूँ उनकी सोच को सलाम करना चाहता हूँ.. कि आखिरकार उन्होंने इतनी बड़ी मांग जो की है.. आखिर किस तरह का बर्ताव अल्पसंख्यकों के साथ किया जाता है रोहिणी जी…हद्द है हद्द है.. भाई भारतीय एनआरआईज जो अच्छा कारोबार कर रहे हैं.. अच्छे अच्छे पदों पर बैठकर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं.. चाहें वो कोई भी क्षेत्र हो.. उन्हें निशाने पर लेकर आखिरकार एजेंडा क्यों चलाया जा रहा है..

अब एक और साहब है,इन्होने लिखा कि उन सभी ने भारतीय पासपोर्ट छोड़ दिये. लेकिन वो सभी भारत माता को प्यार करते हैं जैसे कि एक आदमी ने एक अमीर विदेशी महिला से शादी कर ली…लेकिन ‘प्यार’ वो अभी भी उस गांव में अकेली रोती माँ से ही करता है… इनका कहना है कि NRI भारतीयों ने पासपोर्ट छोड़ दिए किसी अमीर महिला से शादी कर ली और अपनी माँ को रोते हुए घर अकेले छोड़ दिया.. अब इन साहब को कौन समझाए.. कि घर से बाहर कई लोग देश के अलग अलग हिस्सों और विदेशों में रह रहे हैं.. घर परिवार.. माँ बाप सबको छोड़कर…. क्या वे सभी भी अपनी मां को इसलिए छोड़कर आये है कि उनकी माँ रोये. हालाँकि कुछ लोग ऐसे हैं जो घर से बाहर निकलकर पूरी तरह बाहरी होकर रह जाते हैं मतलब घर परिवार से दूरी बना लेते हैं इसका मतलब ये तो नही कि पूरे NRI भारतीय एक जैसे हैं.. खैर ये तो प्रोपगैंडा स्टार.. आगे बढ़ते हैं और आपको एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं…

एक आकडे के मुताबिक प्रवासी भारतीयों ने वित्त वर्ष 2018-19 में देश में पैसा भेजने का रिकॉर्ड बनाया. भारतीयों ने चीन, मैक्सिको जैसे देशों को भी पछाड़ दिया… और 2018 में प्रवासी भारतीयों ने 79 अरब डॉलर भारत में भेजे.. ये आकड़ा भारत की कुल GDP का लगभग 3 प्रतिशत है..

विश्वबैंक की ‘माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बाद चीन का नंबर आता है. चीन में उनके नागरिकों द्वारा 67 अरब डॉलर भेजा गया. यह हिस्सा चीन की जीडीपी का 0.5 प्रतिशत है इसके बाद तींसरे मैक्सिको (36 अरब डॉलर), चौथे नंबर पर फिलिपीन्स (34 अरब डॉलर) और मिस्त्र (29 अरब डॉलर) के साथ पाचवें स्थान पर है. अब आप खुद हो सोचिये भारत के एनआरआई कितने बड़े पैमाने में भारत में पैसा भेजते हैं.. जिससे ना केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है बल्कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ता है.. अमेरिका की बात करें तो वहां लगभग भारतीय मूल के 40 लाख लोग रहते हैं जो कुल अमेरिकी आबादी का 1.3 प्रतिशत हैं, और उनका अमेरिका की राजनीति पर अच्छा-खासा प्रभाव भी है.. यही एक और बड़ी वजह भी है जिससे भारत का प्रभाव अधिक रहता है… लेकिन अब कुछ भारतीय लोगों को ही इन एनआरआई से परेशानी होने लगी है.. एक एजेंडे के तहत उनके खिलाफ मुहीम चला रहे हैं..जो काम कोई दुश्मन करता वो हमारे ही देश के कुछ महान नागारिक कर रहे हैं..

 दरअसल हाउडी मोदी का कार्यक्रम जबरदस्त तरीके से सफल माना जा रहा है.. जब एक मंच पर दुनिया के दो ताकतवर नेता 50000 हजार लोगों के सामने मौजूद थे… इस कार्यक्रम को सफल बनाने के पीछे एनआरआई भारतीयों का सबसे बड़ा योगदान था.. जिससे भारत की ताकत पूरी दुनिया के सामने मज़बूत हुई और पाकिस्तान की हालत तो पूछों ही मत.. वो तो आप जानते ही हैं..

  जो ये कुछ लोग हैं ना एनआरआई भारतीयों के खिलाफ बोलने वाले लोग… शायद इन्हें दिक्कत एनआरआई से नही है.. और ना ही इन्हें उनके परिवार से है और ना ही इन्हें चिंता उनके माँ बाप से है.. उन्हें दिक्कत इस बात से है कि कैसे एनआरआई लोगों ने साथ मिलकर howdy मोदी के कार्यक्रम को इतने बड़े पैमाने पर सफल बना दिया है..

इस पूरे विषय पर आप क्या सोचते हैं हमे कमेंट करके जरूर बताइए..