लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बीच भारतीय वायुसेना को मिली नयी ताकत, वायुसेना के बड़े में शामिल हुआ तेजस’ का दूसरा स्क्वाड्रन

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लद्दाख में भारत और नेपाल के बीच जारी तनाव के बीच भारतीय वायुसेना को आज नयी ताकत मिली. वायु सेना बेडे़ में ‘तेजस’ का दूसरा स्क्वाड्रन शामिल हो गया है. इस स्क्वाड्रन का नाम फ्लाइंग बुलेट्स दिया गया है. एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने खुद स्वदेशी फाइटर जेट तेजस उड़ाया. स्वदेशी तकनीक से बना तेजस चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान है. इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया गया है. भारतीय वायुसेना ने पहले ही 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया है.

आइये एक नज़र डालते हैं तेजस की खूबियों पर. तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इसमें सिंगल इंजन का इस्तेमाल किया गया है जो अमेरिकी है. इसमें डेल्टा विंग्स का इस्तेमाल किया गया है. आज कल ज्यादातर लड़ाकू विमानों में डेल्टा विंग्स का इस्तेमाल किया जाता है. तेजस का वजन 6,560 kg है, इसकी ऊंचाई 4.4 मीटर और लंबाई 13.2 मीटर है. इसका डिजाइन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने तैयार किया है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया है. इसके डेल्टा विंग की चौड़ाई 8.20 मीटर है और इसकी रेंज 1,850 किलोमीटर तक है. इसमें इजरायल के बने रडार और हथियारों से लैश किया गया है.  तेजस एक बार में 2,300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. तेजस की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है. ये हवा से हवा और हवा से जमीन पर अचूक वार कर सकता है. तेजस को उड़ान भरने के लिए ज्यादा लम्बे रनवे की जरूरत नहीं है. ये आधे किलोमीटर से भी उड़ान भर सकता है. ये इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

तेजस में सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करने वाले मिशन कंप्‍यूटर का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ओपन आर्किटेक्‍चर फ्रेमवर्क को ध्‍यान में रखकर डिजाइन किया गया है. भविष्य में इसे अपग्रेड किया जा सकता है. तेजस के वायुसेना में शामिल हो जाने के बाद वायुसेना को गज़ब की ताकत मिल गई है.