कोरोना को लेकर वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी, 2 साल तक नहीं हटायें पाबंदियां नहीं तो होंगे ये परिणाम

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दुनियाभर के देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी कोरोना का कहर थम नहीं रहा है. हर दिन कोरोना के मरीजों की रफ़्तार काफी तेजी से बढ़ रही है. दुनियाभर के देश इस बीमारी का इलाज ढूढ़ने में लगे हुए हैं न ही इसकी दवा बनी है न ही कोई वैक्सीन तैयार हुई है जिससे लोगों को इस बीमारी से बचाया जा सके. अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या 5 लाख से भी ज्यादा हो चुकी है और हर दिन हजारों लोग जान दे रहे हैं.

जानकारी के लिए बता दें कोरोना वायरस से बचने का एक ही मात्र इलाज अभी यही है कि लोग आसपास के लोगों से दूरी बनाकर रखें और घरों में ही रहें. कोरोना की बढ़ती रफ़्तार को देखते हुए दुनिया के तमाम देशों को न चाहते हुए भी लॉकडाउन करना मज़बूरी हो गया है क्योंकि इससे बचने का अभी यही मात्र एक इलाज है. भारत में 21 दिनों के लॉकडाउन खत्म होने के बाद 3 मई तक के लिए फिर से आगे बढ़ा दिया गया है.

सरकार ने अब सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को और भी सख्ती से पालन करने का आदेश दे दिया है. पीएम मोदी ने भी खुद लॉकडाउन का फायदा देश को संबोधित करते हुए बताया कि लॉकडाउन की वजह से ही आज हमारे देश की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर है. इसी बीच वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से बचने के लिए बड़ा ऐलान किया है.

गौरतलब है कि वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए चेतावनी देते हुए कहा है कि 2022 तक सोशल डिस्टेंसिंग का सहारा ही लेना पड़ सकता है नही तो स्थिति और भी भयानक हो सकती है. नयी स्टडी में शोधकर्ताओं ने कहा है कि आने वाले सालों में कोरोना वायरस से फिर से एक बार तबाही मच सकती है. जर्नल साइंस में प्रकाशित हुए शोध में कहा गया है कि सिर्फ एक बार लॉकडाउन करने से महामारी पर नियंत्रण पाना मुश्किल है. रोकथाम के उपायों के बिना कोरोना वायरस की दूसरी लहर और भी ज्यादा भयावह हो सकती है. हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ और स्टडी के लेखक मार्क लिपसिच ने कहा है कि संक्रमण दो चीजें होने पर फैलता है एक संक्रमित व्यक्ति और दूसरा कमजोर इम्यून वाले लोग. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग ही इससे बचने का बड़ा उपाय है. वैज्ञानिकों ने अभी से ही आगाह कर दिया है कि 2 साल तक ये पाबंदियां नहीं हटायें नहीं तो परिणाम भयावह हो सकते है.