निजी स्कूलों की बढ़ती फ़ीस को लेकर अब सरकार बनाएगी कानून?

निजी स्कूलों में मनचाही फीस डिमांड करने के विषय से जुदा मामला अब संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा में शुक्रवार को शून्य काल के समय सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया. अब सरकार के समक्झ निजी स्कूलों की मनमानी कर हर वक्त बधाई जा रही फीस को नियंत्रित करने के लिए कानून लाने की मांग उठ रही है.

भाजपा के संसद श्वेत मलिक ने कहा कि ‘कुछ bussinessman शिक्षा के क्षेत्र में आ गए हैं और शिक्षा को भी उद्योग जगत की ही तरह मुनाफा कमाने का जरिया बना रखा है. इन स्कूलों में पहले तो infrastructure के नाम पर शुल्क लिया जाता है उसके साथ ही उनके द्वारा निर्धारित जगह से ही हमेशा किताबें और स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने के सक्त निर्देश दिए जाते हैं, ये एक तरह का शोषण है, क्यूंकि, स्कूल जहाँ से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने को कहते हैं, वहां इन चीजों के दाम हमेशा अन्य जगहों से ज्यादा होते हैं. लेकिन बच्चों के माता पिता न चाहते हुए भी दोगुने या ज्यादा पैसे चुकाकर किताबें व यूनिफॉर्म खरीदते हैं.’ मलिक ने आगे कहा की ‘बच्चों के घर वाले अपने लिए एक घर तक नहीं बनवा पाते और एक ही स्कूल की एक से अधिक इमारतें खड़ी हो जाती हैं.’

राज्यसभा में उठी इस चर्चा में कई अलग-अलग दल के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये, कईयों ने निजी स्कूलों की जमाझोरी के खिलाफ कानून बनाए जाने की सक्त अपील की. कई सालों से दश भर में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठती रही है. लेकिन अब तक इसपर कोई ऐसी कार्यवाई नहीं हुई, और इनका व्यापार बढ़ता चला गया. अब तक कदम नहीं उठाया गया है. यहाँ मुख्या बात ये रहेगी की राज्यसभा में मांग उठने के बाद, इस मामले पर सरकार आगे निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करने के लिए कोई कानून बनाएगी या नहीं.

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