जानिए, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के मौके पर पीएम मोदी की ये बेहतरीन योजनाएं

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8 मार्च….ये हर रोज की तारीख की तरह बस तारीख मात्र नहीं है..यह दिन है महिलाओं के नारीत्व के जश्न, उनके हक..उनके सम्मान की बात करने का..जिसे पूरा विश्व आज ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मना रहा है..प्रधानमंत्री मोदी जब यह कहते हैं कि, ‘महिलाओं के नेतृत्व में हो देश का विकास’ तो यह सिर्फ उनका कथन नहीं होता। वह इस कथन को सच्चाई में बदलने की राह भी बना रहे होते हैं। आईए महिला दिवस के मौके पर जानते है मोदी सरकार के उन योजनाओं और फैसलों के बारे में जिनसे महिलाओं की जिंदगी बदलने का काम किया..

1.उज्ज्वला योजना

मोदी सरकार ने महिलाओं तक साफ स्वच्छ ईंधन पहुंचाने का प्रण लिया, ताकि महिलाओं को लकड़ी के चूल्हे से उठने वाले धुएं से बचाया जा सके..उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 6 करोड़ से ज्यादा LPG कनेक्शन बांटे गए. इस योजना में प्रत्येक गैस कनेक्शन के लिए हर महिला को 1600 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई. इस योजना के तहत एक कनेक्शन में सिलेंडर, रेगूलेटर और पाइप शामिल है..इस योजना ने महिलाओं की सेहत के साथ ही पर्यावरण को भी फायदा पहुंचा है। नीति स्पष्ट और नीयत नेक हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।

2. शौचालय निर्माण

भारत में एक बड़ा तबका ऐसा था, जिनके यहां शौचालय नहीं थे. केंद्र ने 1 फरवरी 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2014-19 में 9.74 करोड़ शौचालय बनाए हैं. जिसके बाद मौजूदा वक्त में 90 फीसदी से ज्यादा भारतीय शौचालय का इस्तेमाल कर पाते हैं, जबकि 2014 में 40 फीसदी से भी कम लोग शौचालय का उपयोग कर रहे थे. घर में शौचालय का ना होना महिलाओं के लिए कष्टदायी था, उन्हें नित्य-क्रिया के लिए घर से बाहर जाना पड़ता था. मोदी सरकार की इस योजना से महिलाओं के जीवन स्तर में काफी बदलाव आया. क्योंकि स्वच्छता और शौचालय से सिर्फ सम्मान ही नहीं स्वास्थ्य भी जुड़ा है।

3. ‘सुकन्या समृद्धि योजना’

15 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत में पीएम मोदी ने सुकन्या समृद्धि खाता कार्यक्रम की शुरुआत की. इसका मकसद बेटियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था. योजना के तहत 1 फरवरी 2019 तक 1.52 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं. इन खातों में 25,979 करोड़ से ज्यादा रुपये बच्चियों के नाम से जमा हुए. बता दें कि यह योजना 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए है.‘प्रगति’, ‘उड़ान’ और ‘स्वामी विवेकानंद सिंगल गर्ल चाइल्ड’ जैसी छात्रवृत्तियों से बेटियों के असंख्य सपनों को वृहद आकाश मिला है।

4. तीन तलाक बिल

तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं था..लेकिन सरकार ने अपने कार्यकाल में तीन तलाक बिल पेश किया..बता दें, इस बिल को लोकसभा में पास कर दिया गया है लेकिन राज्यसभा में इसे पारित होना बाकी है..हालांकि सरकार ने बिल को अध्यादेश लाकर कानून की शक्ल दे दी है, जिसमें तीन तलाक देने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है..

5. मैटेरनिटी लीव

कामकाजी महिलाओं के मां बनने पर मिलने वाली छुट्टियों को मोदी सरकार ने बढ़ाकर 26 सप्ताह किया. इससे पहले भारत में महिलाओं को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलता था. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिये गर्भवतियों का स्वास्थ्य सुनिश्चित हुआ है। इसके लागू होने के बाद से 1 फरवरी 2019 तक लगभग 50 लाख महिलाओं ने पेड मैटरनिटी लीव का लाभ उठाया.

6. मुद्रा और स्टैंडअप इंडिया

इन योजनाओं के अलावा मुद्रा और स्टैंडअप इंडिया से भी करीब 9 करोड़ लोग लाभान्वित हुए, जिसमें महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या है. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ से बेटे-बेटी में भेद मिटा है। जब वह हर सरकारी स्कूल में बच्चियों के लिए अलग शौचालय अनिवार्य करते हैं तो इसका अर्थ है कि वह बच्चियों के स्वास्थ्य और शिक्षा, दोनों के प्रति गंभीर हैं। यही नहीं, सरकार में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़-चढ़ कर रही है. इस समय सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी समेत कई महिला नेताएं सरकार में उच्च पदों पर आसीन हैं.

महिला सशक्तीकरण दशकों तक राजनीति के गलियारे में मात्र स्वार्थसिद्धि का हथियार बना रहा। जब आवश्यकता हुई तो उसे निकाल लिया और जब काम हो गया तो वापस ठंडे बस्ते में रख दिया, लेकिन आज इस शब्द के वास्तविक अर्थ न सिर्फ समझ आने लगे हैं, बल्कि दिख भी रहे हैं।