क्या आप जानते हैं कि गांधी खानदान के नाम पर देश में कितनी योजनायें चल रही हैं? ये रिपोर्ट देखिये

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आज हमारी नजर एक आर्टिकल पर पड़ी जिसमें लिखा गया था कि हाल ही तीन राज्यों में जीत दर्ज कर सत्ता में पहुंची कांग्रेस सरकार अब योजनाओं और परियोजनाओं का नाम बदलने पर लगी हुई है. तब हमने सोचा कि आज हम आपको ये जानकारी दें कि कितने योजनायें ऐसी है जो गांधी खान के नाम पर चलती आ रही है.एक अनुमान की मानें तो देश में करीब 600 सरकारी योजनाओं के नाम नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखे गए हैं..आइये हम आपको पूरी लिस्ट दिखाते हैं.


राज्य सरकार की योजनाओं में 25 राजीव गाँधी और 27 इंडिया गाँधी के नाम पर योजनायें चल रही है. दोनों को अगर मिला दिया जाए तो 52 योजनायें ऐसी हैं जो राजीव और इंदिरा गाँधी के नाम पर राज्य में चल रही है.
खेल या ट्राफी की बात करें तो 23 राजीव गाँधी, 4 इंदिरा गाँधी 2 जवाहर लाल नेहरु के नाम पर चल रही है. इन्हें अगर कुल मिला दिया जाए तो 29 योजनायें ऐसी हैं जो गांधी परिवार के नाम पर चल रही है.
अब शैक्षिणक और युविवार्सिटी की बात करें तो 55 राजीव गांधी 21 इंदिरा गाँधी, 22 जवाहर लाल नेहरु के नाम पर चल रही है.
इतना ही नही, 74 सड़के, जगह और इमारतों के नाम 51 अवार्ड, 37 संस्थान, फेस्टिवल और 39 चिकित्सा संसथान और अस्पताल गांधी-नेहरु परिवार के नाम पर चल रही है.
15 स्कॉलरशिप, 15 म्यूजियम, नेशनल पार्क और पांच एयरपोर्ट या बंदरगाह गांधी नेहरू खानदान के नाम पर चल रही है.
कुछ और योजनाये जो नाम पर चल रही है…इनमे से 16 राजीव गांधी, 8 इंदिरा गाँधी, 3 जवाहर लाल नेहरु, 4 बी आर आंबेडकर और एक अटला जी के नाम पर चल रही है.
600 योजनायें ऐसी जो जवाहर लाल नेहरू, राजीव गाँधी और इंदिरा गांधी के नाम पर चल रही है. ये सिर्फ एक अनुमान है..अनुमान….असल में इनकी संख्या और अधिक भी हो सकती है.

वैसे भी कांग्रेस पार्टी पर परिवारवाद का आरोप बहुत पहले से लगता आ रहा है. एक के बाद एक कांग्रेस अध्यक्ष गाँधी-नेहरु खानदान से ही बनता आ रहा है. मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने पर काफी बवाल हुआ था. हालाँकि यहाँ सोचने वाली बात तो यह भी है कि आखिर चार सालों में पीएम मोदी ने गाँधी-नेहरु खानदान के नाम से चल योजनाओं और परियोजनाओं के नाम नही बदले लेकिन वहीँ तीन राज्यों में जीत कर सत्ता में आई कांग्रेस अब कई योजनाओं के नाम बदलने की तैयारी में हैं.

सिर्फ कांग्रेस के अध्यक्ष ही नही देश में ऐसी कई सारी पार्टियाँ है जिनके राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके ही परिवार से चुने जा रहे हैं. हालाँकि भारतीय जनता पार्टी इस मामले से दूर खड़ी दिखाई दे देती हैं. समाजवादी पार्टी में अध्यक्ष पद के ड्रामे को लेकर परिवारवाद का नमूना पूरा देश देख चुका है.