सावरकर को लेकर शिवसेना और कांग्रेस में महाभारत, टूटने के कगार पर रिश्ते

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इब्तिदा-ए-इश्क़है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या” … मीर तकी मीर की लिखी ये लाइने इन दिनों शिवसेना और कांग्रेस के रिलेशनशिप पर खूब फिट बैठ रही है. जुम्मे जुम्मे 1 महीने भी नहीं हुए अभी कांग्रेस और शिवसेना को रिलेशनशिप में आये और अभी से ही ब्रेकअप की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. ये रिलेशनशिप कितनी दूर चल पाएगी इस बारे में अटकलें लगनी शुरू हो गई है. इसकी वजह बने हैं सावरकर.

कांग्रेस और शिवसेना भारतीय राजनीति में उत्तर और दक्षिण धुव की तरह हैं. सत्ता के लालच ने दोनों ध्रुवों को मिला तो दिया लेकिन दोनों पार्टियों के लिए सावरकर वो लक्षण रेखा है जिसके पार कोई नहीं जा सकता. भारतीय राजनीति में सावरकर वो शख्सियत हैं जिनकी विचारधारा के दम पर शिवसेना अपनी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति करते हैं. कांग्रेस के लिए सावरकार और उनकी विचारधारा दोनों अछूत हैं. इसलिए जब राहुल गाँधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में गरजते हुए मैं राहुल सावरकर नहीं जो माफ़ी मांग लूं कहा तो शिवसेना तिलमिला गई. उसका तिलमिलाना वाजिब भी था.

कांग्रेस के साथ आने के साथ ही शिवसेना पर आरोप लग रहे हैं कि वो सेक्युलर (मुस्लिम तुष्टिकरण) हो गई है और अपने हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता कर लिया है ऐसे में अगर वो राहुल द्वारा सावरकर पर दिए बयान पर चुप्पी साध लेती तो शिवसेना ख़त्म हो जाती. इसलिए नपे तुले शब्दों में ही सही संजय राउत ने राहुल के बयान का प्रतिकार किया. संजय राउत ने मराठी में ट्वीट किया,  “हम पंडित नेहरू, महात्मा गांधी को भी मानते हैं, आप वीर सावरकर का अपमान ना करें, बुद्धिमान लोगों को ज्यादा बताने की जरूरत नहीं होती.”

कांग्रेस और शिवसेना के साथ रिलेशनशिप में एनसीपी भी साझीदार है इसलिए ना तो सीधे सीधे सावरकर के पक्ष में कुछ कहा और न कांग्रेस के खिलाफ. उसने बस शिवसेना को शायराना अंदाज में सलाह दी. एनसीपी नेता नवाब मलिक ने एक शायरी ट्वीट करते हुए लिखा. “सितारों के आगे जहाँ और भी हैं, अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं” .. उन्होंने इस ट्वीट में संजय राउत को भी टैग किया जो साफ़ साफ़ इशारा था कि शिवसेना को सरकार चलाने के लिए अभी और इम्तेहान देने होंगे. अब देखना है कि शिवसेना कब तक इम्तिहानों को पास करती है.