पाकिस्तान को ठेंगा दिखा कर सऊदी अरब भारत में करेगा 100 अरब डॉलर का निवेश

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इस्लाम और कौम की दुहाई दे कर कश्मीर मुद्दे पर इस्लामिक देशों का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को सबसे तगड़ा झटका दिया है सऊदी अरब ने. इमरान खान लाख इस्लाम और उम्मा की बात कर मुस्लिम देशों को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश करें लेकिन सऊदी अरब भारत के साथ लम्बा कारोबारी हित देख रहा है. तभी तो उसने भारत में पेट्रो रसायन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और खनन समेत अन्य क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है.

सऊदी अरब के राजदूत डॉ. सऊद बिन मोहम्मद अल साती ने कहा कि भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य है और सऊदी अरब तेल, गैस और खनन जैसे क्षेत्रों में लम्बी भागीदारी पर गौर कर रहा है. अगर आपको याद न हो तो बता दें कि अगस्त में सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी अरामको ने रिलायंस के ऑयल टू केमिकल बिजनेस में 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया था. इसके लिए अरामको, रिलायंस को 15 अरब डॉलर चुकाएगी और इस सौदे के बाद रिलायंस की रिफाइनरी में अरामको प्रतिदन 5 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ती करेगी.

सऊदी अरब के राजदूत अल साती ने कहा कि अरामको की भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ प्रस्तावित भागीदारी से दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों की रणनीतिक प्रकृति का पता चलता है. उन्होंने ये भी कहा कि भारत में तेल की आपूर्ति, पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स के क्षेत्र में निवेश करना अरामको और सऊदी अरब की वैश्विक रणनीति में शामिल है. भारत के साथ सऊदी अरब का बढ़ता व्यापारिक सम्बन्ध युवराज मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 का हिस्सा है. आपको बता दें कि विजन 2030 के तहत सऊदी अरब पेट्रोलियम उत्पादों पर आर्थिक निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है. अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा तेल की खपत वाला मुल्क है. भारत सऊदी अरब से अपनी जरूरत का 17 प्रतिशत कच्चा तेल और 32 प्रतिशत एलपीजी खरीदता है और दोनों देशों के बीच करीब 34 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है. सऊदी अरब में करीब 25 लाख भारतीय काम करते हैं और रहते हैं.

ऐसे में सऊदी अरब, भारत जैसे बड़े बाज़ार को पाकिस्तान के बहकावे में आ कर खोने की गलती नहीं कर सकता. पाकिस्तान को ये बात हमेशा खलती रहती है कि इस्लामिक देश होने के बावजूद सऊदी अरब का झुलाव भारत के पक्ष में होता है, उसका निवेश भारत में होता है. सऊदी अरब की भारत के प्रति बढती नजदीकियों का पाकिस्तान खुल कर विरोध नहीं करता क्योंकि उसे पता है कि कर्ज के लिए उसे अरब मुल्कों का मुंह ही ताकना है. इमरान खान बस इतना कह कर अपनी झल्लाहट मिटा लेते हैं कि भारत 1 अरब का बाज़ार है और मुस्लिम देश उसके लालच में फंसे हैं.

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद इस्लाम की दुहाई देकर दुनिया के मुस्लिम देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश में पाकिस्तान असफल रहा है. इन हालातों में भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सऊदी की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं, लेकिन सऊदी अपना फायदा भारत के साथ अच्छे कारोबारी रिश्तों में तलाश रहा है.