कांग्रेस के ‘शत्रु’ अपने दिल में रखते हैं भाजपा के लिए प्यार

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चुनाव का मौसम और बयान बाज़ी का सम्बन्ध बहुत पुराना है…. साथ साथ आरोप-प्रत्यारोप, गठबंधन भी इसी से सम्बंधित है …चुनाव के दौरान बहुत लोग अपनी पार्टी बदलते है … आम बोल चाल की भाषा में उन्हें दल बदलू नेता भी कहते हैं…इसी लिस्ट में हाल में ही शामिल हुए है सत्रुघन सिन्हा … वैसे भी सत्रुघन सिन्हा किसी परिचय के तो मोहताज़ नहीं फिर भी आपको बता दें की पटना साहिब से महागठबंधन के उम्मीदवार ने कुछ दिनों पहले ही उ बीजेपी का साथ छोड़ कर महागठबंधन का दामन थाम लिया है…भले ही बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रहे हों लेकिन अभी भी वो दिल से बीजेपी से दूर नहीं हुए हैं. 

बीजेपी का साथ तो छूट गया लेकिन शायद आज भी उनके लिए एक सॉफ्ट कार्नर रखते है सत्रुघन सिन्हा तभी तो एक न्यूज़ चैनल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ही उन्हें इस  चुनाव के ट्रेंड में लाया …चुनावी गलियारों में उनको पहचान दिलाने में बीजेपी का सबसे बड़ा योगदान है…लेकिन  साथ में ही पीएम मोदी के रोड शो पर चुटकी लेते हुए कहा कि ये बीजेपी की हताशा और घबराहट ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रांची में रोड शो करना पड़ रहा है…. अब पीएम मोदी के पॉपुलैरिटी और काम से विपक्ष हतास है या कोई और ये बताने की चीज़ नहीं.. खैर यह सत्रुघन सिन्हा  की यह निजी राय है…

हालांकि सत्रुघन सिन्हा ने अपने  लगाव को ज़ाहिर करने से रोक नहीं पाए फिर उन्हें अचानक से याद आया होगा कि उन्होनें पार्टी बदल ली है…और इससे कहीं पार्टी में मतभेद न हो जाए इसलिए बात को मेकअप करते हुए उन्होंने कहा की ..

“बीजेपी ने आडवाणी जी को दरकिनार कर दिया, मुरली मनोहर जोशी को लोग ढूंढ रहे हैं कि वो कहां हैं. लोग मोदी की नीतियों और घोषणाओं से आहत हैं, त्रस्त हैं, ग्रस्त हैं. आम से लेकर खास तक सभी किसी न किसी बात से नाखुश हैं. आज देश में कोई नहीं कह रहा कि पीएम साहब ने जबर्दस्त काम किया है. इसके साथ ही शत्रु ने ये भी कहा कि बीजेपी से मेरा आज भी लगाव है. पार्टी के पुराने दिग्गजों की मैं आज भी इज्जत करता हूं. मुझे देशमुख जी से लेकर आडवाणी और अटल जी से बहुत कुछ सीखने को मिला है. मैं पार्टी के खिलाफ फिलहाल कुछ नहीं बोलूंगा.”

वैसे यहाँ भी उन्होंने balanced equation बनाए रखा है….सत्रुघन सिन्हा का हाल और उनका attitude वैसा ही हो गया “चित भी मेरी पट भी मेरी”… ऐसा लग रहा है जैसे उनको लोक सभा चुनाए में हार नजर आ रही है जिसके वजह से वो दोनों पार्टियों के तरफ अपना लगाव दिखा रहे है …

हालांकि जब सत्रुघन सिन्हा ने आडवाणी जी के दर किनार होने की बात कही तो वो शायद ये भूल गए थे की कई ऐसे दिग्गज नेता है जो इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे क्योंकि बीजेपी ने 75  साल से अधिक के उम्मीदवारों को टिकेट नही दिया … और अगर आडवाणी जी की बात करें तो उनके स्वस्थ और उम्र को देख कर उनको टिकेट नहीं दिया गया .. लेकिन ऐसा कही announce नहीं हुआ की उन्हें दर किनार किया गया ..

खैर बीजेपी के खिलाफ बोलना विपक्ष का तो राज धर्म है…. और सत्रुघन सिन्हा भी विपक्ष में है .. तो वो balance बना आलोचना कर रहे…