लोगों की देशभक्ति पर सवाल उठा रही है भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा

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पुलवामा में हुए 14 फरवरी को सीआरपीएफ के जवानों पर हमला जम्मू एवं कश्मीर में 1989 में आतंकवाद के सिर उठाने के बाद से हुआ अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है… इस हमले के बाद देश मे हर तरफ गुस्से का माहौल है. फिल्म जगत से लेकर खेल जगत के कई सेलिब्रेटियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इसकी निंदा की है। कईयों ने शहीद जवानों के परिवारों को मदद की पेशकश भी की है। लेकिन इन सब के बीच टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की सोच इससे अलग है. उन्हें लगता है कि सोशल मीडिया पर हमले को लेकर हर कोई गुस्सा जाहिर करे ऐसा जरूरी नहीं है.हालांकि पुलवामा आतंकी हमले को लेकर भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने भी ट्वीट कर अफसोस जाहिर किया है.

सानिया मिर्जा ने लिखा, ‘यह पोस्ट उन लोगों के लिए है, जो सोचते हैं कि मशहूर हस्तियों के रूप में हमें किसी हमले की निंदा ट्विटर और इंस्टाग्राम पर करनी चाहिए.यह साबित करने के लिए कि हम देशभक्त हैं और हमें देश की परवाह है. क्यों?? क्योंकि हम सेलेब्स हैं.’ और आप में से कुछ ऐसे निराश व्यक्ति हैं, जिनके पास अपने गुस्से को निकालने के लिए कोई टारगेट नहीं है तो नफरत फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं.‘ सानिया ने आगे लिखा, ‘मैं अपने देश के लिए खेलती हूं, इसके देश के लिए पसीना बहाती हूं और इसी तरह मैं अपने देश की सेवा करती हूं और साथ ही अपने CRPF के जवानों और उनके परिवार के साथ खड़ी हूं.’

सानिया ने आगे लिखा कि ’14 फरवरी का दिन भारत के लिए एक काला दिन था और मैं उम्मीद करती हूं कि हमें फिर ऐसा दिन न देखना पड़े. यह दिन कभी नहीं भूला जाएगा. मैं शांति के लिए प्रार्थना करती हूं. गुस्सा तभी तक अच्छा है, जब तक इससे कुछ अच्छा निकलकर आ रहा है और किसी व्यक्ति को ट्रोल करने से आपको कुछ हासिल नहीं होगा.’

सानिया जी आपने बहुत अच्छी बात कही .लच्छेदार शब्दों में ऐसी बातें आप इसीलिए कर पा रही हैं… क्योंकि इस देश ने आपको अपनी बेटी माना आपको मान सम्मान दिया. आप अपनी जगह सही हो सकती हैं… लेकिन आप उन लोगो को गलत नही ठहरा सकती जो सोशल मीडिया या किसी भी प्लेटफॉर्म से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है… सबको हक़ है इस देश मे अपनी बात रखने का… आपके संबंध पाकिस्तान में है.. आपके पति पाकिस्तान से हैं… हम समझ सकते है आपकी मजबूरी… लेकिन अपनी तरफ़ से आप सबको देशभक्ति का सर्टिफिकेट मत बांटिए… आप को जो सही लगता है करिये… आप को दुख है तो व्यक्त करिये… नही है तो मत करिए… ऐसे मुद्दों पे डिप्लोमेटिक बातें मत कीजिये… जाके पूछिये उन शहीदों के परिवार वालों से… जिनके मांस के लोथड़े से उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है, शहीद के घर वाले हम से हमारी सरकार से क्या चाहते है… जो वो चाहते है वही होना चाहिए. आज की तारीख में उनकी भावनाओ से ज्यादा कीमती किसी की भावना नही है.तो उम्मीद है आप समझ रही होंगी की कभी कभी न बोलना ज्यादा अच्छा होता. इसके बजाय कि आप ऊल जुलूल बयान देकर. देश के लोगो का गुस्से को और बढ़ाइए.देश वैसे ही गम और गुस्से में है. आप इसमे शरीक नही हो सकती तो कम कम से किसी की भावनाओं का अपमान मत करिए.