कश्मीर पर तीन साल पुराना आर्टिकल शेयर कर सागरिका घोष ने फैलाया झूठ

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बीते दिनों एक वीडियो वायरल हुआ जिसमे पाकिस्तान के एक पूर्व मंत्री कह रहे थे कि भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जो पाकिस्तान के शुभचिंतक हैं .उन्होंने कई लोगों के नाम लिए … अरुंधती रॉय, ममता बनर्जी, कांग्रेस पार्टी, लेफ्ट पार्टी . उसके अलावा भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके अब्दुल बासित ने शोभा डे के नाम का खुलासा किया . लेकिन अब ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के मंत्री जी ने जिन लोगों के नाम नहीं लिए थे, उन लोगों ने इसे दिल पर ले लिया और कड़ी मेहनत करने लगे पाकिस्तान के शुभचिंतक भारतियों की लिस्ट में अपना नाम डलवाने के लिए.

इनमे सबसे अग्रणी है सागरिका घोष . सागरिका घोष ने ये तय कर लिया कि वो अपना नाम पाकिस्तान के शुभचिंतकों कि लिस्ट में शामिल करवा के रहेंगी . इसलिए उन्होंने एक ऐसा आर्टिकल शेयर किया जिसमे ये बताया जा रहा है कि भारतीय सुरक्षाबल कश्मीरियों के प्रदर्शन को रोकने के लिए गुलेल का प्रयोग कर रहे हैं और गुलेल से फेंके जाने वाले गोले में मिर्ची पाउडर भरा हुआ है . ये आर्टिकल लिखा है एलिसन जैक्सन ने, लेकिन इस आर्टिकल को लिखा गया है 2016 में और इस आर्टिकल में गुलेल चलाते सुरक्षाकर्मी की जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है वो 2009 में खिंची गई थी.

एक तरफ जहाँ भारत सरकार और जम्मू कश्मीर पुलिस ये कह रही है कि आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद से एक भी गोली अभी तक नहीं चलाई गई वहीँ सागरिका घोष 3 साल पुराने पुराने आर्टिकल और 10 साल पुरानी तस्वीर शेयर कर के प्रोपगैंडा फैला रही है. और जब यूजर्स ने इस पर आपत्ति जताई कि ये पुरानी आर्टिकल है तो सागरिका बड़ी ही ढिठाई और बेशर्मी से ये कह रही है कि हाँ ये आर्टिकल और तस्वीर पुरानी है लेकिन ये तकनीक 2009 से अब तक इस्तेमाल हो रही है . यहाँ सागरिका गुलेल चला कर प्रदर्शनकारियों को भगाने की तकनीक की बात कर रही हैं . मतलब की एक तो चोरी और ऊपर से सीनाजोरी का शानदार उदाहरण पेश कर रही हैं सागरिका घोष .

सागरिका घोष मोदी सरकार और भाजपा की कटु आलोचक रही हैं लेकिन अब वो इस सरकार का विरोध करते करते राष्ट्रविरोधी बन चुकी हैं . साफ़ जाहिर है कि इस वक़्त 3 साल पुराना आर्टिकल और 10 साल पुरानी तस्वीर एक ख़ास साजिश के तहत शेयर की जा रही है . अगर सागरिका की नियत साफ़ होती या उनके पास वर्तमान की कोई तस्वीर होती तो वो उसे सामने लाती ना कि 3 साल पुराने आर्टिकल को शेयर करती .

सागरिका पुरानी खबर और पुरानी तस्वीर के जरिये कश्मीरियों को भड़काने की कोशिश कर रही है, विदेशों में ये दिखाना चाहती है कि कि कश्मीर में भारत सरकार अत्याचार कर रही है . ये राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है. अगर इतना सब करने के बाद कोई उन्हें राष्ट्रद्रोही कह दे तो सागरिका और उनके जैसे लिबरल और अर्बन नक्सल गैंग के लोग संघी और भक्त बता कर खारिज करने में देर नहीं लगाते . अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर झूठ फैलाओ और जब उस झूठ का मुंह बंद करो तो चीखना शुरू कर दो कि इमरजेंसी आ गई है . असहिष्णुता आ गई है और आवाज दबाई जा रही है कह कर स्क्रीन काली कर दो . ये वामपंथी, लिबरल और अर्बन नक्सल गैंग यही करती आई है .