सिर्फ इतनी सी बात पर सागरिका घोष ने पूर्व सैन्य अधिकारी का कर दिया अपमान

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एक मशहूर पत्रकार हैं सागरिका घोष. मोहतरमा ट्विटर पर ज्ञान बघार रही थीं कि एयरकंडीशन ड्राइंग रूम में बैठ कर कॉफ़ी पीते हुए अमन और आशा कि बातें करने वाले लिबरल उन लोगों के मुकाबले ज्यादा देशभक्त होते हैं जो गरीबों के बच्चों को बॉर्डर पर भेजते हैं. और जब एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने उनकी बातों का विरोध किया तो सागरिका बदतमीजी पर उतर आईं और पूर्व सैन्य अधिकारी का अपमान कर दिया .

सागरिका ने एक किताब लिखी है, “व्हाई आई एम लिबरल” . उसी किताब से कुछ लाइन उन्होंने द वायर के ट्वीट को कोट करते हुए लिखा – लिबरल देशभक्त जो शांति की पैरोकार हैं, अपने देश को उन लोगों से ज्यादा प्यार करती हैं जो गरीबों की संतानों को अपनी रक्तरंजित आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मोर्चे पर भेजना चाहते हैं.” इस ट्वीट में लिबरल देशभक्त शब्द का प्रयोग उन्होने खुद के लिए किया और रक्तरंजित आकांक्षाओं का प्रतीक देश  की सरकार को बताया .

सागरिका के ट्वीट पर आपत्ति जताई मेजर नवदीप सिंह ने . मेजर नवदीप सिंह भारतीय टेरिटोरियल आर्मी के पूर्व अधिकारी हैं और पेशे से वकील हैं .  नवदीप सिंह ने सागरिका की बातों पर विरोध जताते हुए कहा – “मैं भी लिबरल और शांति के पैरोकार हूँ. लेकिन, वर्दी पहनने वाले गरीबों की संतान नहीं हैं. हम (भारतीय सेना) अपने नेता की रक्तरंजित आकांक्षाओं को पूरा करने वाली ‘मिलिशिया’ नहीं है, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक संविधान के तहत काम करने वाली ईकाई है.”

सागरिका ने उनको जवाब दिया – “वातानूकुलित कमरे में बैठे राजनेताओं के इशारे पर लड़ने वाले ज्यादातर जवान गरीबों की संतान हैं.” सागरिका की बात को काटते हुए मेजर सिंह ने कहा – “इस तर्क से तो निचले ग्रेड के सभी सरकारी कर्मचारी और यहॉं तक कि प्राइवेट सेक्टर के लोग भी गरीब परिवारों से हैं. इसलिए, केवल सेना पर सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है.”

अपनी ज्ञान भरी बातों को काटा जाता देख सागरिका ने अपना आपा खो दिया और बदतमीजी पर उतर आईं. उन्होंने मेजर नवदीप को मुर्ख कह दिया जो सागरिका का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा हो. लेकिन नवदीप सिंह ने मर्यादा नहीं खोई और सागरिका को जवाब दिया.

सागरिका घोष ने जिन मेजर नवदीप सिंह का अपमान किया, उनकी उपलब्धियां सागरिका के उस कूड़ा किताब से कहीं ज्यादा मूल्यवान है . मेजर नवदीप सिंह भारतीय टेरिटोरियल आर्मी के सदस्य रह चुके हैं .

क्या है टेरिटोरियल आर्मी

प्रादेशिक सेना (Territorial Army ) भारतीय सेना की एक ईकाई तथा सेवा है। इसके स्वयंसेवकों को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि आवशयकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिये हथियारों के साथ उनकी सेवायें ली जा सकें. लेकिन एसी ड्राइंग रूम में बैठी महाज्ञानी सागरिका जी के लिए ऐसे लोगों का कोई महत्त्व नहीं .