भोपाल में दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा हो सकते है आमने-सामने

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लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की भोपाल सीट हमेशा से ही चर्चा में रही है, और एक बार फिर ये सीट चर्चा में आ गई, जब ये खबर चली कि बीजेपी भोपाल से साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने के बारे में सोच रही है..बता दें कि कांग्रेस पहले ही भोपाल से पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के नाम का ऐलान कर चुकी है, जो कि काफी विवादित नेता रहे हैं। दिग्विजय सिंह कई बार देश को तोड़ने वाले और हिंदू विरोधी बयान भी दे चुके हैं। चर्चा है कि बीजेपी भोपाल से कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के सामने हिंदुत्व का चेहरा मानी जाने वाली साध्वी प्रज्ञा को उतारने के बारे में विचार कर रही है..पार्टी इस फैसले के नफा-नुकसान के बारे में सोच रही है। यदि ऐसा होता है तो भोपाल सीट पर काफी ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है..क्योंकि दिग्विजय सिंह के सामने साध्वी प्रज्ञा को एक मजबूत और अच्छा उम्मीदवार माना जा रहा है..

बता दें कि, साध्वी पहले ही दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा ज़ाहिर कर चुकी है। एक निजी चैनल से बातचीत में साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि अगर संगठन उनको दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने को कहेगा तो वह इसके लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा था, “वह दिग्विजय सिंह को अपना दुश्मन मानती हैं. साथ ही उन्होंने दिग्विजय सिंह को ‘देश का दुश्मन’ भी बताया था..

आईए आपको बतातें है कि साध्वी प्रज्ञा कौन है और कब चर्चा में आई थी-

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं, जब 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वह 9 सालों तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार 23 दिनों तक यातना दी गई थी। साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘हिंदू आतंकवाद’ का जुमला गढ़ा और इस नैरेटिव को सेट करने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाया गया। साध्वी प्रज्ञा 2007 के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था। हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा का शुरुआत से ही दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ रुझान था। वह आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं।

वहीं दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह ने ‘हिंदू आतंकवाद’ खिलाफ अभियान चलाया था। बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के आजमगढ़ स्थित घर पर भी वह गए थे और उनके परिवारों से मुलाकात की थी। इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के सीनियर पुलिस ऑफिसर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गए थे। और हाल ही में इन्होंने एयर स्ट्राइक पर भी सवाल उठाए थे..दिग्विजय सिंह विवादित बयान देने के लिए जाने जाते है..

बता दें कि दिग्विजय सिंह 16 साल बाद चुनाव लड़ने जा रहे है..

1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह 2003 के बाद से अबतक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नहीं लड़े हैं। तब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद दिग्विजय ने ऐलान किया था कि वह अगले एक दशक तक न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही राज्य की राजनीति में कोई दखल देंगे। और अब वो लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से लड़ रहे है..
बता दें की भोपाल बीजेपी का गढ़ रहा है..यहां पार्टी पिछले 30 सालों से चुनाव जीतती आ रही है..साल 2014 में यहां से भाजपा उम्मीदवार आलोक सांजर ने बंपर जीत हासिल की थी. उनको 7.14 लाख से ज्यादा वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के पी सी शर्मा को 3.43 लाख वोट मिले थे..

बहरहाल, अगर लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह v/s साध्वी प्रज्ञा का नाम पक्का होता है तो ये भी पक्का हो जाएगा कि भोपाल सीट पर काफी ध्रुवीकरण देखने को मिलने वाला है। भोपाल में दिग्विजय के लिए साध्वी प्रज्ञा एक बड़ी चुनौती ही नहीं बड़ी भारी भी पड़ेगी। लेकिन अब तक बीजेपी की ओर से किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है..चुनाव से ऐन पहले बीजेपी किसे अपना टिकट देकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में उतारती है, यह अबतक स्पष्ट नहीं हो सका है. बीजेपी की तरफ से साध्वी प्रज्ञा के साथ पूर्व सीएम शिवराज और महापौर आलोक शर्मा का नाम चर्चा में है.