भोपाल के जंग में कौन होगा विजयी, साध्वी प्रज्ञा या दिग्विजय सिंह

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मुकाबला होगा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा के बीच..यह मुकाबला इसलिए भी रोचक माना जा रहा है क्योंकि 16 साल बाद दिग्विजय मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं और उनका मुकाबला उनकी धुर विरोधी साध्वी प्रज्ञा से होने जा रहा है..

इस मुकाबले को दिग्विजय के लिए आर-पार की लड़ाई माना जा रहा है तो वहीं साध्वी प्रज्ञा के लिए यह एक तरह से सियासत की शुरुआत है. लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिग्विजय के लिए यह मुकाबला भारी ना पड़ जाए. क्योंकि भोपाल लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ है और कांग्रेस 1984 के बाद यहां से जीत दर्ज नहीं कर पाई है..

आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो भोपाल में आखिरी बार कांग्रेस 1984 में जीती थी. इसके बाद यहां 35 साल से लोकसभा चुनाव में लगातार बीजेपी जीतती आ रही है. 1989 में सुशील चंद्र शर्मा ने यहां पर बीजेपी का खाता खोला था इसके बाद वो 1991, 1996 और 1998 में वो लगातार जीते. इसके बाद 1999 में यहां से उमा भारती, 2004 और 2009 में कैलाश जोशी और 2014 में आलोक संजर चुनाव जीते थे..उनको 7.14 लाख से ज्यादा वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के पी सी शर्मा को 3.43 लाख वोट मिले थे..

1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह 2003 के बाद से अबतक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नहीं लड़े हैं। तब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद दिग्विजय ने ऐलान किया था कि वह अगले एक दशक तक न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही राज्य की राजनीति में कोई दखल देंगे। और अब वो लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से लड़ रहे है..

बता दें कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं, जब 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वह 9 सालों तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार 23 दिनों तक यातना दी गई थी। साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘हिंदू आतंकवाद’ का जुमला गढ़ा और इस नैरेटिव को सेट करने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाया गया। साध्वी प्रज्ञा 2007 के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था। हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा का शुरुआत से ही दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ रुझान था। वह आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं।

वहीं दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह ने ‘हिंदू आतंकवाद’ खिलाफ अभियान चलाया था। बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के आजमगढ़ स्थित घर पर भी वह गए थे और उनके परिवारों से मुलाकात की थी। इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के सीनियर पुलिस ऑफिसर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गए थे। और हाल ही में इन्होंने एयर स्ट्राइक पर भी सवाल उठाए थे..दिग्विजय सिंह विवादित बयान देने के लिए जाने जाते है..

बहरहाल, दिग्विजय सिंह की भोपाल लोकसभा सीट पर जीत इसलिए भी मुश्किल हो सकती है क्योंकि बीजेपी ने मध्य प्रदेश में किसी बाहरी नेता को लोकसभा चुनाव का प्रभारी बनाने के बजाय पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कमान दी है. साध्वी प्रज्ञा के नाम के ऐलान होने के बाद शिवराज और संघ एक्टिव हो गए और भोपाल में तत्काल मीटिंग भी बुलाई और बीजेपी के नेताओं को एकजुट करना शुरू कर दिया है.

देखा जाए तो साध्वी प्रज्ञा को शिवराज का साथ मिलने के बाद दिग्विजय के लिए लड़ाई और मुश्किल हो गई है. क्योंकि भोपाल में शिवराज अच्छी खासी पकड़ रखते हैं और यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी उनकी पैठ है. ऐसे में माना ये जा रहा है कि शिवराज की छवि का फायदा साध्वी प्रज्ञा को मिल सकता है..