सबरीमाला मंदिर की आड़ में ‘एजेंडा’ चलाने वाले की पहचान जल्द से जल्द करें : केरल हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 3 महीने बाद आखिरकार 2 महिलाएं सबरीमाला मन्दिर में घुस ही गयी… चारो तरफ शोर शराबा होने लगा… समर्थक इसे कामयाबी बता रहे है और विरोधी इसे भगवान अयप्पा का अपमान बता रहे आस्था पे चोट बता रहे… इन्ही सब के बीच केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला को लेकर एक टिपण्णी की है जो सुर्खिया नही बन और खबर दब सी गयी उधर, जैसे ही मंदिर में महिलाओं के जाने की सूचना फैलने लगी, राज्य में स्थिति तनाव पूर्ण होती चली गई। जगह-जगह हिंसा फैल गई है। कई जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक राज्य में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिसमें 21 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

केरल हाईकोर्ट में मंगलवार को सबरीमला मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति पी आर रामाचंद्रन मेनन और न्यायमूर्ति एन अनिल कुमार वाली एक खंड पीठ ने यह जानना चाहा कि पुलिस ने निलक्कल से पांबा तक एक अधिकार समूह की महिला कार्यकर्ताओं के निजी वाहन को जाने की क्यों अनुमति दी.सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं को लेकर अब तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया जा रहा है कि दोनों महिलाओं को मंदिर में दर्शन करने के लिए भेजना एक अजेंडा था।

सबरीमाला की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “अगर राज्य सरकार हालात को काबू नहीं कर पा रही है, तो उसे बाहरी एजेंसियों को यहां लाया जाना चाहिए.सरकार पर निशाना साधते हुए केरल हाईकोर्ट ने कहा कि सबरीमला श्रद्धालुओं के लिए है और राज्य सरकार को भगवान अयप्पा मंदिर के शांतिपूर्ण माहौल को बर्बाद करने का एजेंडा रखने वालों की पहचान करनी चाहिए.अदालत ने माहवारी उम्र की दो महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर यह जानना चाहा कि इन महिलाओं के यहां आने के पीछे कोई ‘एजेंडा’तो नहीं था.

सबरीमला के विशेष आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि माहवारी उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी और अधिक सतर्क हो गए हैं और पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराना मुश्किल हो रहा है क्योंकि रोजना एक लाख श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं .

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