आज पीएम मोदी ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए SAARC देशों के साथ विडियो कांफ्रेंसिंग की और मिल कर कोरोना से लड़ने का संकल्प लिया. इस विडियो कांफ्रेंसिंग में भारत के अलावा बांग्लादेश, मालदीव, भूटान, अफगानिस्तान, नेपाल और श्रीलंका के राष्ट्राध्यक्षों ने ने भी हिस्सा लिया. लेकिन दुनिया भर में आतंकवाद फैलाने वाले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की हिम्मत नहीं हुई कि वो पीएम मोदी का सामना कर सके इसलिए उन्होंने कैमरे पर अपने एक प्रतिनिधि को भेज दिया. जहाँ SAARC के सभी सदस्य देश मिल कर कोरोना से लड़ने की रणनीति बना रहे थे वहीं पकिस्तान की तरफ से शामिल हुए उसके प्रतिनिधि ने वहां भी कश्मीर का राग अलापना शुरू कर दिया.

पाकिस्तान के प्रतिनिधि बन कर शामिल हुए वहां के स्वास्थ्य मंत्री ज़फर मिर्ज़ा ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए कश्मीर में जारी प्रतिबंधों को हटाना चाहिए. पाकिस्तान की बातों को SAARC के बाकी सदस्य देशों ने वैसे ही इग्नोर कर दिया जैसे अब तक दुनिया के बाकी देश करते आये हैं. लेकिन इतने सीरियस मुद्दे पर भी अपना एजेंडा चला कर पाकिस्तान ने अपपनी फजीहत जरूर करवा ली.

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब पाकिस्तान ने अपने छात्रों को मरने के लिए चीन के वुहान में ही छोड़ दिया था. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा था कि जीना और मरना तो अल्लाह के हाथों में है. इसलिए प्पकिस्तान के छात्रों को वहीँ रहना चाहिए. जबकि भारत ने अपने छात्रों को निकाल लिया था. पाकिस्तानी छात्रों के कई विडियो वाय्रक हुए जिनमे वो भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ़ कर रहे थे जबकि अपने पीएम इमरान खान को खरी-खोटी सुना रहे थे. जिस पाकिस्तान को अपने नागरिकों की फ़िक्र नहीं वो आज कश्मीर के लोगों की फ़िक्र होने का ड्रामा कर रहा है. लेकिन दुनिया भी उसकी हरकतों से वाकिफ हो चुकी है. इसलिए कोई पाकिस्तान की बातों पर ध्यान नहीं देता.