अमेरिका में भारत के लिए इस तरह से फील्डिंग सेट कर रहे हैं विदेश मंत्री एस जयशंकर

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वाशिंगटन डीसी, वो शहर जहाँ अमेरिका की रणनीतियां तय होती है और यहाँ बनी रणनीतियों से बहुत हद तक दुनिया भर के देश प्रभावित होते हैं. कहते हैं कि अगर आप वाशिंगटन डीसी की सबसे ऊँची बिल्डिंग पर चढ़ कर कोई पत्थर उछाले तो वो किसी न किसी थिंकटैंक के ऊपर गिरेगा. अमेरिकी थिंकटैंक का जिक्र हम आज इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पिछले 7 दिनों से अमेरिका में है और वहां के प्रमुख थिंकटैंक से मुलाक़ात कर रहे हैं.

अगर उपरी तौर पर देखें तो इन मुलाकातों में कुछ विशेष बात नज़र नहीं आएगी लेकिन अगर गहराई से विश्लेषण करें तो ये भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिहाज से ये मुलाक़ात बहुत महत्वपूर्ण. अमेरिका की विदेश नीति व्हाइट हाउस से तय नहीं होती बल्कि ये थिंकटैंक तय करते हैं. ये थिंकटैंक ही तय करते हैं कि इरान और सऊदी अरब के साथ कैसे रिश्ते रखने हैं, अफगानिस्तान के मामले में पाकिस्तान का इस्तेमाल कैसे करना है. UN भाषण में कश्मीर का जिक्र करना है या नहीं करना है ये भी थिंक टैंक ही तय करता है. तो अब आप समझ गए होंगे विदेश मंत्री एस जयशंकर का अमेरिकी थिंकटैंक से मुलाकातों की गहराई को.

पिछले 72 घंटों में एस जयशंकर वॉशिंगटन डीसी के प्रमुख 5 थिंकटैंकों- द ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यून और द हेरिटेज फाउंडेशन, अटलांटिक काउंसिल, कार्निज इन्डोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस, सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक ऐंड इंटरनैशनल स्टडीज के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर चुके हैं. वाशिंगटन आने से पहले जयशंकर 2 दिनों तक न्यूयॉर्क में थे और न्यूयॉर्क में उन्होंने सेंटर फॉर फॉरेन रिलेशंस और एशिया सोसाइटी से मुलाक़ात की थी. ये तब की बात है जब पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली को संबोधित कर भारत वापस लौट चुके थे.

अमेरिकी थिंकटैंकों के साथ एस जयशंकर की मुलाकातों का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जयशंकर विदेश मंत्री बनने से पहले अमेरिका में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं और इसलिए उन्हें अमेरिकी मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है. अमेरिकी डिप्लोमेट्स और थिंकटैंक को हैंडल करने का एस जयशंकर को पुराना अनुभव है. आने वाले दिनों में उनकी मुलाक़ात अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ, रक्षा मंत्री मार्क एस्पर, NSA रॉबर्ट ओ’ब्रायन और कार्यवाहक गृह मंत्री मैक एलीनन से होनी है.

जिस वक़्त पीएम मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में संबोधन देने की तैयारी कर रहे थे और विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाक़ात कर रहे थे, उस वक़्त विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 42 देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाक़ात की और तीन संगठनों की बैठकों में हिस्सा लिया. पीएम मोदी से इतर एस जयशंकर कश्मीर और पाकिस्तान को लेकर भारत की फील्डिंग सेट कर रहे थे और इसी का परिणाम था कि तुर्की और मलेशिया के अलावा किसी और देश ने कश्मीर पर एक शब्द नहीं कहा.

भारत ने अपने पुराने मित्र देश रूस से 5.2 अरब डॉलर में अत्याधुनिक मिसाइल डिफेन्स सिस्टम S-400 खरीदने का निर्णय लिया है जिसपर अमेरिकाने आँखे तरेरी है. हालाँकि अमेरिका के नाराजगी के सवालों पर जयशंकर ने अमेरिका में बैठ कर ये साफ़ किया कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं ये भारत का एकाधिकार है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि लोग यह बात समझेंगे कि यह सौदा हमारे लिए कितना महत्त्वपूर्ण है. ये बातें उन्होंने एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के कार्यालय में बैठ कर कही.

आपको बता दें कि रूस की यूक्रेन एवं सीरिया में सैन्य संलिप्तता और अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों के कारण अमेरिका ने 2017 कानून के तहत उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया है जो रूस से बड़े हथियार खरीदते हैं.
ऐसे में अब ये साफ़ हो जाता है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर जो बीते एक हफ़्तों से वाशिंगटन थिंकटैंक को मथ रहे हैं उसके पीछे क्या वजहें हैं और क्या गहराई है. उनके प्रयासों को सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में ट्रम्प के भाषण में कश्मीर का जिक्र नहीं हुआ.