‘हाथ जोड़ना इस्लाम विरोधी है फिर भी मैं हाथ जोड़ती हूँ’

1415

कश्मीर में अफवाहों का बाजार गर्म है. नेताओं से लेकर आम कश्मीरी और पूरा भारत ये सोच रहा है कि आखिर कश्मीर में हो क्या रहा है? महबूबा मुफ़्ती ने शुक्रवार शाम को एक प्रेस कांफ्रेस करके कहती है कि इस्लाम में हाथ जोड़ना गुनाह है लेकिन फिर भी मैं हाथ जोड़ती हूँ कि कश्मीर से उसकी पहचान मत छीनिए.

दरअसल पिछले कुछ समय से कश्मीर में सेना की हलचल तेज हो गयी है. जवानों की कई कम्पनियों को भेजा जा रहा है. इसी से कश्मीर के नेताओं के होश उड़े हुए हैं कि आखिर होने क्या जा रहा है इसके साथ ही साथ आम कश्मीरियों में तरह तरह की अफवाहें फैलाई जा रही है, जिससे लोगों ने अपने घरों के सामान को पहले से इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. बाजारों में भारी भीड़, पेट्रोल पम्प पर लोग गाडी की टंकी को फुल करवा रहे हैं कि ना जाने क्या होने जा रहा है. यहाँ आपको यह भी जानना जरूरी है कि किसी बड़ी आतं’की घटना के इनपुट मिलने और अमरनाथ यात्रा के रूट पर भारी गो’ला-बारू’द मिलने से सेना और सरकार ने अमरनाथ यात्रा रोक दी और एडवाइजरी जारी कर कहा कि सभी श्रद्धालु और पर्यटक जितना जल्दी हो, कश्मीर को खाली कर दें और वापस चले जाए. इसी पर एतराज जताते हुए महबूबा मुफ़्ती ने प्रेस कांफ्रेंस की

एडवाइजरी जारी होने के बाद रात 9 बजे महबूबा मुफ़्ती ने प्रेस कांफ्रेस की और शुरुवात में ही कहा कि इस्लाम में हाथ जोड़ना गुनाह है लेकिन मैं सरकार से हाथ जोड़ती हूँ कि कश्‍मीरियों से उनकी पहचान मत छीनिए. मैंने 70 साल में घाटी में डर और भय का ऐसा माहौल नहीं देखा. प्रशासन की इस एडवाइजरी ने घाटी में डर का माहौल बना दिया है. जैसा डर अभी फैला है, वैसा मैंने कभी नहीं देखा. एक तरफ राज्‍यपाल कह रहे हैं कि यहां पर हालात सामान्‍य हैं, वहीं दूसरी केंद्र सरकार यहां पर लगातार सैनिकों की संख्‍या बढ़ा रही है. पर्यटकों को तो वापस भेज रहे हैं लेकिन कश्मीरियों का क्या होगा वे कहाँ जायेंगे?

इसद प्रेस कांफ्रेस में महबूबा के चेहरे को देखने पर पता चल रहा था कि उन्हें कश्मीरियों की चिंता कम खुद की चिंता ज्यादा है. इसके बॉस उन्होंने कहा कि हम कश्मीर के सभी बड़े नेताओं के साथ  बैठक करने जा रहे हैं.

जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ यात्रा को रोकने और टूरिस्ट्स की ओर से होटल खाली करने के बाद खबर ये भी है कि राज्य के किश्तवाड़ जिले में होने वाली दुर्गा यात्रा निलंबित कर दी गई है.  किश्तवाड़ के डीसी अंग्रेज सिंह राणा ने कहा कि अगले आदेश तक यह यात्रा निलंबित की जा रही है. हालांकि उन्होंने ऐसा किये जाने के पीछे वजह की जानकारी नहीं दी. मिली जानकारी के अनुसार 43 दिन तक चलने वाली ‘माचैल माता यात्रा’ सुरक्षा कारणों से रोकी गई है.’

खैर कश्मीर में अफवाहों का बाजार गर्म है, कभी स्कूलों के बंद होने अफवाह फ़ैल रही हैं तो कहीं धारा 144 लगाने की अफवाह फ़ैल रही हैं, तमाम तरह की अफवाहों के बीच में आम कश्मीरी अपने घरों के जरूरी सामान इकट्ठा करने में लगे हुए हैं.

कश्‍मीर के डिवीजनल कमि‍श्‍नर ने कहा, नई एडवाइजरी के बाद कहीं भी कर्फ्यू नहीं लगाया गया है. घाटी में शनिवार को स्‍कूल सामान्‍य तरीके से खुलेंगे. हमें शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखना है. गृह मंत्रालय ने जो एडवायजरी जारी की है, वह उन्‍होंने अपने इनपुट के आधार पर जारी की है.

दरअसल कश्मीर के नेताओं को अंदेशा है कि सरकार जम्मू कश्मीर को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने जा रही है लेकिन कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को बीच में रोकने को अन्य मुद्दों के साथ जोड़कर ‘अनावश्यक भय’ पैदा किया जा रहा है . उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने तथा  अफवाहों पर भरोसा ना करने की अपील करने का’ अनुरोध भी किया.

लेकिन सोचने वाली बात ये है कि जम्मू कश्मीर के नेता खुद ही परेशान है कि आखिर हो क्या रहा है तो वे अनुरोध किससे करें, क्या करें.. दरअसल आधी अफवाह तो कश्मीरी नेता खुद फैला रहे हैं.. तो शांति की बात कर ही कैसे सकते हैं.

इसके साथ ही आपको यहाँ बताते चलें कि राजभवन से जारी किए गए इस बयान में कहा गया है, ‘‘राज्यपाल मलिक ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों के पास अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमलों के संबंध में गंभीर और विश्वसनीय सूचनाएं हैं. इस संदर्भ में सरकार ने परामर्श जारी कर यात्रियों और पर्यटकों से जल्द से जल्द लौटने के लिए कहा है.’ मलिक ने बारामूला और श्रीनगर में कहा था कि जम्मू कश्मीर को विशेष शक्तियां देने वाले संविधान के अनुच्छेद 35ए को रद्द करने की कोई योजना नहीं है.

गृह विभाग के प्रधान सचिव शालीन काबरा द्वारा जारी आदेश में यहां कहा गया है, ‘आतं’कवादी खतरों खासतौर से अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाए जाने की ताजा खुफिया सूचनाओं और कश्मीर घाटी में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए पर्यटकों तथा अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के हित में यह परामर्श दिया जाता है कि वे फौरन घाटी में रुकने की योजना स्थगित कर दें और जल्द से जल्द लौटने के आवश्यक कदम उठाए.

खैर सेना की तैनाती और गृह मंत्रालय के इस फैसले से कश्मीरी नेताओं के दिमाग में तमाम तरह की बातें जरूर घूम रही होंगी, हालाँकि होने क्या जा रहा है, या नही होने जा रहा है.. आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा ही.. लेकिन अफवाहों का बाजार अभी भी गर्म है कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने जा रहा है. अफवाह इस हद तक हावी हो गयी है कि महबूबा मुफ़्ती  को धर्म से ऊपर उठकर, इस्लाम के विरोध में जाकर हाथ जोड़ने की नौबत आ गयी है.