लॉकडाउन के बीच RSS कुछ इस तरह कर रहा है गरीबों की मदद

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RSS यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है. अगर आप किसी वामपंथी या विपक्षी से पूछे तो उसके लिए RSS की परिभाषा एक हिंदूवादी और साम्प्रादायिक संगठन से ज्यादा कुछ नहीं है. लेकिन अगर आप किसी बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में, किसी भूकंप प्रभावित क्षेत्र या किसी भी अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्र के लोगों से RSS के बारे में पूछेंगे तो फिर आप जानेंगे कि RSS क्या है?

समूचे देश में कोरोना के खिलाफ एक जंग चल रही है. इस जंग में अपने सामर्थ्य के हिसाब से हर कोई योगदान दे रहा है. कोई धन से मदद कर रहा है तो कोई कर्म से मदद कर रहा है. कोरोना को हराने के लिए देश में लॉकडाउन लगा तो सबसे ज्यादा प्रभावित दिहाड़ी मजदूर वर्ग हुआ. सब कुछ बंद हो आने से उसका रोजगार छिना तो खाने के लाले पड़ गए. ऐसे में सामने आता है RSS. वही RSS जिसे वामपंथी और विपक्षी सांप्रदायिक संगठन कहता है.

कामकाज बंद होने से परेशान दिहाड़ी मजदूरों के लिए सहारा बना RSS. झुग्गियों में, मलिन बस्तियों में RSS के स्वयंसेवक आपको गरीबों में खाने का पैकेट बांटते आसानी से दिख जायेंगे. बीते दिनों आनंद विहार में जब उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले हज़ारों प्रवासी कामगारों की भीड़ उमड़ पड़ी तो ऐसे में एक बार फॉर RSS मोर्चे पर डटे दिखा. भीड़ को नियंत्रित करते हुए. भूखे लोगों को खाना खिलाते हुए.

RSS के कम्युनिटी किचेन में खाना तैयार करने से लेकर खाना पैकिंग करने और उसके वितरण तक में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जा रहा है. RSS एक ऐसा संगठन है जिसके स्वयंसेवकों की पहुँच गाँव गाँव तक है. RSS के स्वयंसेवको के पास ऐसे लोगों की लिस्ट है जिन्हें इस लॉकडाउन की वजह से भोजन नहीं मिल पा रहा. वे उन्हें दोनों समय का भोजन या अनाज के पैकेट उपलब्ध करा रहे हैं.

लखनऊ में संघ के सेवा विभाग की ओर से दो स्थानों पर राहत शिविर भी लगाए गए हैं. ऐसे ही कई शिविर राजधानी दिल्ली और कई अन्य छोटे-बड़े शहरों में चल रहे हैं. ऐसे लोग जो गरीबों और लाचारों की सेवा तो करना चाहते हैं लेकिन किसी कारणवश नहीं कर पा रहे तो उनके लिए RSS के स्वयंसेवक वॉलंटिअर का काम कर रहे हैं.

इस मुश्किल वक़्त में वो लोग गायब है जो संविधान बचाने के नाम पर सड़कों पर बैठते हैं. वो लोग गायब हैं जो हर छोटी बड़ी बात पर पत्थरबाजी करते हुए सड़क पर आ जाते हैं. लेकिन आलोचनाओं के बाद भी RSS तन्मयता से देश सेवा में लगा हुआ है.