अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर भागवत का बड़ा बयान,कहा कुछ ऐसा

884

बीती रात गुरुवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जिज्ञासा और समाधान सत्र में शामिल होने पहुँचे थे. वहां पर मौजूद स्वयंसेवक संघ के लोग मौजूद थे, और उन लोगों ने मोहन भागवत से जब सवाल किये तो उनके सवालो का जवाब बेबाकी से दिया. मोहन भागवत ने आगे कहा कि “राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के बनते ही संघ अपने आपको इससे अलग कर लेगा”. साथ ही संघ प्रमुख ने ये भी साफ कर दिया है  कि काशी और मथुरा  हमारे एजेंडे में नहीं है. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) देशहित में है, इसमे किसी की नागरिकता छीनी नही जायेगी और आगे बोला कि  हम लोगो को सीएए से पीछे हटने की जरूरत नहीं है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार की सुबह मुरादाबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) में लगी शाखा के कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे थे. इसके बाद शाम को चार बजे से साढ़े पांच बजे तक जिज्ञासा और समाधान सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे. इस कार्यक्रम में आरएसएस के क्षेत्रीय कार्यकारिणी के चुनिंदा 40 पदाधिकारी मौजूद थे. इस दौरान स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से देश की मौजूदा स्थिति पर सवाल पूछा और उन्होंने सभी सवालों का पूरी बेबाकी और सादगी से जवाब दिया.

संघ के जिज्ञासा और समाधान सत्र में एक स्वयंसेवक ने पूछा कि ‘क्या अयोध्या के बाद अब संघ काशी और मथुरा का मुद्दा उठाएगा’ तो संघ प्रमुख ने अपने जवाब में साफ तौर पर इस पर इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि फिलहाल संघ के एजेंडे में काशी और मथुरा मुद्दा नहीं है, और उन्हेने साथ ही राम मंदिर पर कहा कि संघ की भूमिका इस प्रकरण में सिर्फ ट्रस्ट निर्माण होने तक ही है. इसके बाद संघ खुद अपने को इससे अलग कर लेगा. संघ प्रमुख की बातो ने सब कुछ साफ कर दिया है.  

दरअसल, सूत्रों की मानें तो नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर पूछे गए सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयंसेवकों को उत्तर दे दिया है कि सीएए पर पीछे हटने की कोई जरूरत नहीं है क्योकि ये कानून किसी की भआरत गेश में रहने वाले लोगो की नागरिकता छीनने के लिए नही बनाया गया है, और अगर इसका विरोध हो रहो है, तो  इससे आप लोगों को चिंतित होने की जरूरत नही है. क्योंकि सभी जानते हैं कि यह कानून देशहित में है. संघ प्रमुख ने कहा कि सीएए को लेकर देश में कुछ लोग भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस भ्रम को दूर किया जाए. उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील करते हुए कहा कि सेमिनार, गोष्ठी और बैठकों के जरिए नागरिकता संशोधन कानून पर लोगों के भ्रम दूर करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जाये और उनको इस बारे में सझाने की कोशिश करें, ताकि देश के लोग इस भ्रम से बाहर निकल सकें और देश में शांति कायम हो सके.