आखिर कैसे 1 लाख रूपये लगाकर रोबर्ट वाड्रा ने कमा लिए 325 करोड़

रॉबर्ट वाड्रा नाम तो सुना ही होगा ।पूर्वी यूपी की नवेली महासचिव और गांधी परिवार की बेटी प्रियंका के ये पति है। इनकी खुद की पहचान ये है कि ये बहुत बड़े बिजनेसमैन है। कई सालो से विवादों में फंसे हुए है,किसानों की ज़मीन हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग से सम्बंधित मुकदमे राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट पर चल रहे है। प्रियंका कहती है कि उनके पति पर लगे सारे आरोप झूठे है। अब ये आरोप झूठे है या वास्तुविक्ता से वाकई इनका सरोकार है,ये तो कोर्ट ही तय करेगी लेकिन आज हम आपको करोडपति रॉबर्टवाड्रा के रोडपति अवतार से भी रूबरू कराएंगे। आपको बताएंगे कि कैसे रॉबर्ट ने 1 लाख रुपए लगाकर 325 करोड़ रुपए कमाने तक का सफर तय किया। 

गांधी परिवार के दामाद वाड्रा की कहानी दिल्ली से शुरू नही होती बल्कि इसके लिए आपको उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में चलना होगा,जहां वो पैदा हुए,।

18 अप्रैल 1969 ये वो दिन था जब रॉबर्ट वाड्रा पैदा हुए,पिता राजेंद्र वाड्रा पीतल के बिजनेसमैन थे और मां मौरीन स्कॉटलैंड की रहने वाली थीं.मूल रूप से वाड्रा का परिवार पाकिस्तान के सियालकोट से है, भारत का जब विभाजन हुआ तो राजेंद्र वाड्रा के पिता यानी रॉबर्ट वाड्रा के दादा भारत में आकर बस गए थे.अब उनके परिवार में सिर्फ रॉबर्ट और उनकी माँ मौरीन ही बचे है।

18 अप्रैल 1997 में गांधी परिवार की बेटी प्रियंका से शादी के बाद रॉबर्ट के घर वालो को यूँ तो खुश होना चहिए था लेकिन ऐसा हुआ नही और बाप-बेटे के बीच तनाव पैदा हो गया और खबरे तो यहां तक सामने आई कि उनके पिता को अपने बेटे का प्रियंका से शादी करना पसंद नही था। इसके बाद दोनों के बीच रिलेशन लगातार ख़राब होते गए और 2001 में रॉबर्ट वाड्रा ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि उनके पापा और भाई लोगो को यूपी कांग्रेस कमेटी में पद दिलाने के नाम पर पैसे हड़पते है। रॉबर्ट की अपने पिता से कभी नही बनी लेकिन वो अपनी मम्मी के हमेशा करीब रहे। शायद यही वजह है कि 2007 के बाद बनी 5 कंपनियों में उनकी माँ ही डायरेक्टर है।

अब रॉबर्ट के खुद के परिवार में वो और उनकी माँ मौरीन ही बचे है। क्योकि 2001 में उनकी बहन की कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी और 2003 में उनके भाई ने आत्महत्या कर ली थी। 2009 में उनके पापा राजेन्द्र की भी रहस्यमयी हालत में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

कहा जाता है कि प्रियंका गांधी से शादी के बाद ही उनकी लाइफ बदलनी शुरू हुई और अपने 1 लाख रुपए इन्वेस्ट करके उन्होने 325 करोड़ की सम्प्पति का साम्राज्य खड़ा कर दिया। बवाल तब मचा जब दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने रॉबर्ट पर चार साल में 300 करोड़ की सम्पत्ति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2010 तक वाड्रा की संपत्ति 50 लाख से बढ़कर 300 करोड़ हो गई जबकि उनकी आय का एकमात्र जरिया डीएलएफ से बिना किसी ब्याज के मिला लोन शामिल है.

2014 में अमेरिकी अखबार द वाल स्ट्रीट जर्नल ने कंपनियों की फाइलिंग और जमीन के दस्तावेजों के आधार पर वाड्रा की संपत्ति का आंकलन लगाते हुए एक रिपोर्ट पब्लिश की जिसमे लिखा गया है कि वाड्रा ने 2007 में एक लाख रुपए से शुरू की अपनी कंपनी से 2012 में 12 मिलियन डॉलर यानी 72 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बेची है। इसके अलावा रिपोर्ट में दावा किया गया कि वाड्रा के पास अभी भी 253 करोड़ से ज्यादा की रीयल स्टेट प्रोपर्टी बची हुई है। अब रिपोर्ट में किए गए दावों को अगर सही माने तो साफ है कि महज एक लाख की लागत से खड़ी की गई कम्पनी ने पांच साल के भीतर 325 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाई है।

इसी वेबसाइट के ओर दावों को देखे तो इसमें लिखा है कि 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई तब रॉबर्ट वाड्रा गहनों का छोटा सा बिजनेस करते थे लेकिन 2007 आने तक उन्होंने रियल स्टेट क्षेत्र में स्काई लाइट नाम की एक कम्पनी बना ली। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट स्फेयर्स के रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज के मुताबिक इस कंपनी को 2000 डॉलर से भी कम यानी करीब एक लाख रुपए की रकम से शुरू किया गया था। हालांकि उनकी पत्नी प्रियंका गांधी इस मसले पर  कई बार कह चुकी है ये उनकी खुद की मेहनत से कमाई हुई संपत्ति है और उनके पति कोई गलत काम नही कर सकते। वैसे फिलहाल भी लंदन में 19 करोड़ की सम्प्पति खरीद को लेकर रॉबर्ट वाड्रा ईडी की जांच के घेरे में है। फिलहाल रॉबर्ट से सख्ती से पूछताछ हो रही है जिसके चलते विपक्षी मोदी सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगा रहे है वही सत्तापक्ष का भी साफ कहना है कि कांग्रेस के संरक्षण में रॉबर्ट तरक्की करते गए और रोडपति से करोड़पति बन गए( संबित पात्रा बाइट )

मीडिया के सामने वाड्रा भले ही राजनीति से दूर होने का दावा करते रहे हो लेकिन उन्हें कांग्रेस के मंचो पर और रैलियों में ना जाने कितनी बार देखा जा चुका है। 

ऐसे एक दो मामले नही बल्कि काफी मामले है जिनमे रॉबर्ट  फंसे हुए है। जांच भी लगातार जारी है। सवाल बस यही है कि वाड्रा की संपत्ति लगातार बढ़ती गई लेकिन कांग्रेस क्यो चुप चाप सब कुछ देखती रही, क्यो उसने कार्यवाई की जहमत नही उठाई, मान भी लिया जाए कि अमरीकी वेबसाइट झूठ लिख रही है लेकिन वाड्रा पर तो किसानों की जमीन हड़पने का भी आरोप लगा लेकिन उसकी जांच तक कराने को कांग्रेस तैयार नही हुई। क्यो नही हुई इसका जवाब तो कांग्रेस को देना ही होगा। खैर, अब जांच शुरू हुई है तो देखना दिलचस्प होगा कि आख़िर रोडपति के करोड़पति अवतार का खुलासा हो पाता है या बस ये चुनावी बनकर रह जाता है।

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