इस कदर RK स्टूडियो का बिकना भारतीय सिनेमा की नींव का बिक जाना है

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आवारा छलिया से वो थे…जोकर सा अंदाज़ बहुत प्यारा था उनका …. संगम उन्हें बहुत भाता था… और वह उस देश के वासी थे जिस देश में गंगा बहती है….

फिल्मों को एक अलग पहचान दिलाने वाले … एक्टिंग को एक अलग मोड़ देने वाले राज कपूर की बात होगी आज…. आज उनके उस योगदान की बात  होगी जिसे ना तो कभी  Bollywood industry भूल सकती है और नहीं विश्व… जी हाँ! राज कपूर की चर्चा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि इनके हुनर और काम को पूरी दुनिया सराहती है….

वैसे अगर बात की जाए राज कपूर  के एक्टिंग की तो आज भी उनको एक लीजेंड के तौर पर ही देखा जता है … लेकिन आज हम बात करेंगे उस बारे में जो राज कपूर का गुरूर था … उनकी ज़िन्दगी थी और शायद सब कुछ … आज उस RK स्टूडियो पर ज़िक्र करेंगे जिसकी नीव राखी थी राज कपूर ने… bollywood को एक बहुत बड़ा योगदान दिया था उन्होंने  … तो एक समय उचाईयों के शिखर पर थी जो आज मिटने की कगार पर है…. आर. के. स्टूडियो को आखिरकार बेच दिया गया है…… निजी क्षेत्र की कंपनी गोदरेज प्रापर्टीज ने इस स्टूडियो को खरीद लिया……… कंपनी ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की….. माना जा रहा है कि यह सौदा 50-60 करोड़ रुपये में हुआ…

गोदरेज प्रापर्टीज ने इसपर यह कहा कि, ‘2.20 एकड़ में फैले इस स्टूडियो से करीब 33 हजार वर्गमीटर भूमि का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगीा…. इसमें आधुनिक लग्जरी अपार्टमेंट तथा लग्जरी रिटेल bussiness क्षेत्र की तरह  विकसित किया जायेगा..

वहीं राजकपूर के सबसे बड़े बेटे रणधीर कपूर ने इस सौदे पर कहा ‘‘चेंबूर स्थित यह संपत्ति मेरे परिवार के लिये बेहद महत्वपूर्ण रही है क्योंकि यहां से कई दशक तक आर. के. स्टूडियो का परिचालन हुआ है. हमने इस संपत्ति को लेकर नयी कहानी लिखने के लिये गोदरेज को चुना है.’’…..

चलिए हम आपको ले चलते है RK स्टूडियो के सफ़र पर…

 वैसे बात 1948 की है…. आर.के. फिल्म्स की पहली फिल्म  आग में राज कपूर निर्देशक के रूप में दर्शकों से सामने आए… उस समय राज कपूर सबसे कम उम्र के निर्देशक थे. …..अपने निर्देशन में बनी राज कपूर की फिल्म ‘आग’ सिनेमा घरों में फीकी रही….. डॉयरेक्शन करियर की शुरुआत में ही राज कपूर को बड़ी निराशा का सामना करना पड़ा….

इसके बाद उन्होंने हौसला नही छोड़ा और फिर ‘बरसात’ फिल्म बनाई…. इस फिल्म में उनके साथ नरगिस नज़र आईं….. फिल्म सिनेमा घरों में लगते ही सुपरहिट हो गई और राज कपूर को निर्माता व निर्देशक के रूप में पहली बार सफलता मिली…. कहा जाता है कि इस फिल्म की बदौलत ही उन्होंने आर.के. स्टूडियो की दीवारें खड़ी की….

खैर उसके बाद 1951 में आवार फिल्म की ड्रीम सीक्वन्स के रुप में इस स्टूडियों में सबसे पहला शूट किया गया…… फिल्म आवारा से शुरु हुआ यह कारवां कई फिल्मों तक चलता रहा….. श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, धर्म-कर्म, प्रेमरोग, सत्यम शिवम सुंदरम, आ अब लौट चलें आदि फिल्में आर.के. स्टूडियो में ही  शूट की गई हैं …

लेकिन एक दौर आया था जब RK  स्टूडियो के दिन अच्छे नहीं चल रहे थे…. बात 1970 की है… जब राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर असफल रही थी… कहते है कि राज कपूर की ख़ास फिल्म थी यह … इसलिए उन्होनें अपने जीवन की जमा पूंजी इस फिल्म में झोक दी थी….और 6 साल का समय भी … लेकिन इस फिल्म की विफलता ने RK स्टूडियो को गिरवी होने पर मजबूर कर दिया … और इसके साथ साथ ही ऋषि कपूर क करियर भी अँधेरे  में दिख रहा था … क्योंकि इसी फिल्म से उन्होनें पला कदम रखा था …

लेकिन उसके बाद भी राज कपूर ने हार नहीं मानी … उन्होंने फिल्म ‘बॉबी’ से एक नई शुरुआत की…… इस फिल्म में एक बार फिर राज कपूर ने ऋषि कपूर पर दांव लगाया….. उनके साथ उन्होंने उस समय की बिल्कुल ही नई लड़की ‘डिम्पल कपाड़िया’ को कास्ट किया…. इस जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा और फिल्म इतनी बड़ी हिट रही कि राज कपूर के गर्दिश में पड़े तारे फिर से चमकने लगे थे………

इसके बाद राज कपूर ने जिस भी फिल्म में आर. के स्टूडियो का नाम डाला वह फिल्म हिट होने लगी थी……

फिल्मों के अलावा एक और चीज़ थी जो RK स्टूडियो की बहुत ख़ास थी … वो थी वहां की होली … हर साल बड़े धूम धाम से RK स्टूडियो में होली खेली जाती थी…किसी भी कलाकार को न्योता मिलना सम्मान की बात होती थी …. लेकिन राज कपूर के देहांत के बाद … मतलब की 1970 के बाद होली खेलने का रिवाज़ खत्म हो गया…

वह आर.के. स्टूडियो जिसे राज कपूर ने अपनी धड़कन माना था वहाँ 2017 में आग लग गई थी … और काफी कुछ जल गया था… जिससे काफी नुक्सान हुआ… आया सिर्फ पैसों का बल्कि बहुत सी उन यादों का ….

अब वह जगह बिक चुकी है … काफी कुछ बदल चुका है … शायद सिनेमा के एक युग ने या फिर एक धरोहर ने अपना दम तोड़ दिया….