खुद को पिछड़ों और अतिपिछड़ों का मसीहा कहने वाली RJD की पोल अब खुलने लगी है ?

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के अनुसूचित जाति और जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव शक्ति मलिक की रविवार सुबह अ’प’रा’धि’यों ने गो’ली मा’र’क’र ह’त्या कर दी. बीते दिनों शक्ति मलिक का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे उन्होंने तेजस्वी यादव पर टिकट के बदले 50 लाख मांगने और जातिसू’च’क टि’प्प’णी करने का आ’रो’प लगाया था और साथ ही ये भी कहा था कि तेजस्वी यादव ने उन्हें जा’न से मा’र’ने की ध’म’की दी थी. वायरल विडियो में शक्ति मलिक ने आ’रो’प लगाया था कि जब वो अनिल साधु के साथ तेजस्वी यादव से मिलने पहुंचे तो तेजस्वी यादव ने पहले तो रूपये की मांग की और जब उन्होंने कहा कि विचार करेंगे तब तेजस्वी ने उन्हें जातिसूचक गा’ली देकर कहा कि तुमको विधानसभा नहीं जाने देंगे और अगर तुम अपने लोगों और अपने समाज को एक करने की कोशिश करोगे तो हम तुमको जा’न से म’र’वा देंगे. हम लालू यादव के बेटे हैं.

सत्ता में आने और तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहा लालू परिवार और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल यूँ तो दावा करते हैं कि वो पिछड़ों और अतिपिछड़ों के म’सी’हा हैं लेकिन उनका ये दावा कितना खो’ख’ला है इसकी पोल राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान खुल रही है. पिछड़ों और अतिपिछड़ों की राजनीति करने वाली कई पार्टियाँ राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में खुद को उपे’क्षि’त और अ’प’मा’नि’त महसूस करते हुए अलग हो गई. लिस्ट छोटी नहीं बल्कि बहुत लम्बी है. जीतन राम मांझी से शुरू हुई गिनती उपेन्द्र कुशवाहा होते हुए मुकेश सहनी तक पहुंच चुकी है. जीतन राम मांझी ने पहले ही भां’प लिया था कि राजद उन्हें वो सम्मान नहीं देने वाली जिसकी तलाश में वो महागठबंधन में गए थे. इसलिए जीतन राम मांझी ने पहले ही महागठबंधन का साथ छोड़ दिया. रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा अपने लिए महागठबंधन में सम्मानजनक स्थान का इंतज़ार करते रहे और जब उन्हें लगा कि एक परिवार की पार्टी राजद अपने सामने किसी को कुछ समझती ही नहीं तो उपेन्द्र कुशवाहा ने भी महागठबंधन का साथ छोड़ कर मायावती के साथ गठबंधन करने में ही अपनी भलाई समझी. बिहार में कुशवाहा मतदाताओं की आबादी करीब 4 फीसदी है.

मल्लाह समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले मुकेश सहनी को तो लालू के लालों ने भरे मंच पर अप’मा’नि’त कर दिया जब सीट बंटवारे का ऐलान करने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजद ने कांग्रेस और वामदलों के साथ सीटें बाँट ली और मुकेश सहनी के हाथ कुछ नहीं आया. दरअसल राजद ने मुकेश सहनी के साथ जो किया वो पीठ में छु’रा घों’प’ने जैसा था. इसका जिक्र भरे मंच पर मुकेश सहनी ने भी कर दिया. मुकेश सहनी करीब 10 फीसदी मल्लाह वोटरों के नेता माने जाते हैं.

लालू यादव के जमाने में पिछड़े और अतिपिछडे सिर्फ सत्ता तक पहुँचने की सीढ़ी रहे और उन्ही सीढ़ी का इस्तेमाल करके लालू यादव ने 15 सालों तक बिहार की सत्ता पर राज किया. लेकिन ऐसा लगता है कि तेजस्वी यादव को तो अब इस सीढ़ी की जरूरत नहीं रही. वरना वो इस तरह से पिछड़ों और अतिपिछड़ों का अपमान तो नहीं ही करते.

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