आ’तंकी रियाज नाइकू की मौ’त के बाद वामपंथी मीडिया है बहुत दुखी, वामपंथी मीडिया की ये हरकत देखिये

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जैसे ही कोई आ’तंकी पकड़ा जाता है या मारा जाता है, भारत का वामपंथी और लिबरल जमात तुरंत पता कर लेता है कि फलाने को पेंटिंग का शौक था, फलाना हेडमास्टर का बेटा था और फलाना मैथ का टीचर था. लेकिन आज तक वामपंथी मीडिया ये पता नहीं कर पाता कि आ’तंकी ह’म’ले में मा’रे गए सुरक्षाकर्मी कौन था? उसके क्या शौक थे? ये सब पता करने की जरूरत भी नहीं है क्योंकि ये सब पता करने और लिखने से एजेंडा नहीं चल पायेगा.

पुलवामा में हि’जबु’ल मुजा’हिद्दीन का कमांडर रियाज नाइकू मा’रा गया और वामपंथी मीडिया ने तुरंत अपना एजेंडा चलाना शुरू कर दिया. प्रोपगैंडा वेबसाइट द वायर ने तो रियाज नाइकू के नाम के साथ आ’तं’की लिखने से भी परहेज किया. द वायर ने तो रियाज के लिए ‘हि’जबु’ल मु’जाहि’द्दीन ऑपरेशनल चीफ’ का इस्तेमाल इतनी शान से किया मानों वो किसी MNC का CEO हो. रायटर्स जो भारत विरोधी प्रोपगैंडा चलाने के लिए जाना जाता है उसने तो रियाज नाइकू के लिए मैथ टीचर शब्द का इस्तेमाल करते हुए लिखा, ‘भारतीय सुरक्षा बलों ने मैथ शिक्षक से वि’द्रोही कमांडर बने शख्स को कश्मीर में मा’र डाला.’ रायटर्स ने इस तरह से लिखा मानों रियाज की मौत के बाद मैथ को कितना बड़ा नुकसान हो गया.

कश्मीर में आ’तंकि’यों के एनकाउंटर के बाद उनके लिए मार्मिक महाकाव्य लिखने का चलन मशहूर पत्रकार बरखा दत्त ने शुरू किया था . जब 2016 में बुरहान वानी का एन’काउंट’र हुआ था तो बरखा दत्त ने ही ये ये खोजा कि होगा वो भारत के लिए आ’तं’की लेकिन उनके लिए तो वो गरीब हेड मास्टर का बेटा था. उसके बाद बरखा का चलन वायरस की तरह अन्य वामपंथियों में फैलने लगा. आ’तंकि’यों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर तो वामपंथियों के दिल में पहले भी थे लेकिन अब ये सॉफ्ट कॉर्नर मार्मिक महाकाव्य में बदल गया. NDTV ने आ’तंकि’यों को वर्कर, एक्टिविस्ट बताने का चलन एनडीटीवी ने जिस बेशर्मी के साथ स्थापित किया उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है.