विपक्षियों के मंसूबों पर चुनाव आयोग ने फेरा पानी

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लोकसभा चुनाव के सातों चरण ख़त्म हो चुके है, और नतीजो के लिए फाइनल काउंटडाउन भी शुरू हो चूका है, आपके और हमारे साथ साथ सभी पोलिटिकल पार्टीयां भी चुनावी नतीजों का इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही है,अगर एग्जिट पोल्स की माने तो NDA की सरकार बनते दिख रही है,पर विपक्षीयों का EVM को लेकर रोना बन्द ही नहीं हो रहा है,और कई नेताओं को तो लग रहा है कि लोकतंत्र खतरे में है..यहाँ तक चुनाव के नतीजों से पहले ही विपक्षी पार्टीयों ने evm के ऊपर आरोप लगाना शुरू हो गये,तो वही दूसरी तरफ चुनाव आयोग इन सब आरोपों को और EVM में गड़बड़ी होने वाली बात को सिरे से ख़ारिज करता रहा है,पर फिर भी विपक्ष का EVM को लेकर रोना खत्म होने का नाम ही नहीं ले रा है.पर कैसा लगेगा सुनकर कि नतीजों को आने में देरी हो जाये और वो भी 1 आध घंटे की नहीं बल्कि 2 दिनों की जी हाँ ,हम ऐसा इसलिए कह रहे है क्यों की ईवीएम खुलने से पहले ही विपक्षी पार्टी यों ने अपनी शिकायतों का पिटारा खोल दिया है. कि EVM में गडबडी है,EVM बदला जा रहा है..विपक्ष की इन्ही शिकायतों की वजह से ऐसी आशंकाए लगाई जा रही थी.

EVM और VVPAT के मुद्दे पर चुनाव आयोग से विपक्ष को झटका, पहले VVPAT मिलान की मांग खारिज

चुनावी नतीजों को आने में देरी हो सकती हैऔर कारण ये हो सकता था कि एक लोकसभा चुनाव क्षेत्र में कई विधानसभा क्षेत्र होते हैं,और उन विधानसभा क्षेत्रों में एक चरण पूरा होने के बाद हर दुसरे चरण के मत गणना होती है ,जिसके बाद उन विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों को सेंट्रल टेबल पर जोड़ना होता है. तो ये वो कारण होता है कि एक चरण से दूसरे चरण के रुझान आने में देरी हो जाती है…और फिर लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की तुलना में एक चरण की मतगणना में अधिक वक्त लगता हैं…और विपक्षी पार्टियों की मांग थी कि कम से कम 50 फीसदी वीपीपैट मशीनों और ईवीएम के वोटों से मिलाया जाना चाहिए और अगर अगर आयोग इन पार्टियों की गुजारिश मान लेता, तो औसतन उसे हर सीट पर 125 ईवीएम मशीनों के वोट का मिलान वीवीपैट मशीन के मतों से करना पड़ता.. तो ये प्रोसेस और भी ज्यादा लम्बा हो जाता ,जिस में 2..3..दिन और खीच जाते पर इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को जबाव देते हुए बताया था कि अगर चुनाव आयोग विपक्षी पार्टियों की मांग को मान कर 100 % वीवीपैट मशीन के मतों का ईवीएम के मतों से मिलान करने बैठ जाता , तो उसे चुनावों के नतीजे घोषित करने में 6 दिन की देरीऔर हो जाती..और नतीजे लेट होने की खबर न्यूज़ 18 इंडिया के इस आर्टिकल में पब्लिस हुए थी जिसका स्क्रीन शोर्ट आप यहाँ देख सकते है..आपको यहाँ ये बता दें कि मंगलवार को कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस समेत 22 दलों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी.

लोकसभा चुनाव 2019: नतीजे आने में लग सकते हैं 2-3 दिन, रुझान आने में भी होगी दोपहर- सूत्र

पर नतीजों से ठीक पहले विपक्ष को एक बड़ा झटका लगा है क्यों की (Election Commission) ने मतगणना शुरू होने से पहले वीवीपैट (VVPAT) की पर्चियों की ईवीएम (EVM) के आंकड़ों से मिलान की मांग को खारिज कर दिया है,और चुनाव आयोग ने अपनी मीटिंग के दौरान ये फैसला लिया है कि ईवीएम और वीवीपैट के मुद्दे पर मतगणना जो नियम तय किये गए थे उन्ही के अधार पर होगी…और चुनाव आयोग ने evm ये भी साफ़ किया है कि वोटिंग के बाद evm में गड़बड़ी और उसके साथ हुए छेड़ छाड़ की साडी ख़बरें और मिल रही सारी शिकायतों को शुरुआती जांच के आधार पर गलत बताते हुए कहा है कि मतदान में प्रयोग की गई ईवीएम और वीवीपैट मशीनें ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ में पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

पर यह सवाल ये खड़ा होता है कि जब बीजेपी चुनाव में जितती है तभी ही क्यों साडी विपक्षी पार्टीयों को ईवीएम से छेड़छाड़ दिखाई देती है..तब क्यों नही दिखता जब विपक्ष कि सरकार बनती है..और अगर हम बात करें 2018 विधानसभा चुनाव कि तो उस वक्त विपक्ष को ईवीएम में छेड़छाड़ क्यों नही दिखता…और बीजेपी हार कर भी क्यों EVM में छेड़ छाड़ होने का मुद्दा नहीं उठती …पर विपक्ष इल्जाम लगता है पर कोई छेड़ छाड़ के सबूत नहीं देता..खैर विपक्ष का ये रोना नतीजे आने बाद भी ऐसा ही रहेगा.