अगर आप सवर्ण है तो देखिए Reservation के दायरे में आते है कि नही…??

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नोटबन्दी, GST, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे औचक फैसले लेकर लोगो को चौंका देने वाले पीएम मोदी इस बार भी अचानक से ही गरीब सर्वणों को आरक्षण देने का फैसला कर सबको चौंका दिये. आर्थिक रूप से पिछड़े सर्वणों को 10% आरक्षण देने का रास्ता मोदी सरकार ने लगभग साफ कर दिया. मामला पुराना था काफी वक्त से मांग भी उठ रही तो मोदी सरकार ने टाइमिंग भी ऐसी चुनी जिससे विपक्ष भी ज्यादा ना नुकुर न कर पाए. मन मसोस कर कांग्रेस से लगाये सपा बसपा जैसे दलों को भी इस बिल के समर्थन में आने पड़ा. बिल लोकसभा से पास हो चुका है राज्यसभा में भी लगभग पास होने वाला है. लेकिन इन सबके बीच कुछ विपक्षी नेताओं और कुछ मीडिया समूहों द्वारा एक भ्रांति फैलाई जा रही है. एक अजीबोग़रीब मांग की जा रही है. कहा जा रहा है कि इसमे 8 लाख सालाना आय तक के लोगो को गरीब माना जा रहा है. जो कि ज्यादा है इसकी सीमा महज 5 लाख होनी चाहिए थी. नही तो फिर आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाकर 8 लाख किया जाए. वरना आयकर देने वाला व्यक्ति गरीब कैसे हो सकता है??

इस बात पे ध्यान दिया जाए तो कोई तर्क नही बल्कि एक वाहियात सा कुतर्क नज़र आता है. कैसे आइये बताते है. सरकार ने जो 8 लाख आय की लिमिट तय की है वो पूरे परिवार की आय है. जिसें 2 सदस्य भी सकते है 4 भी हो सकते है 10 भी हो सकते है. सबकी सामूहिक आय को मिला के लिमिट 8 लाख है. अब पूरा परिवार भी मिल के अगर 8 लाख तक ही कमा पा रहा है तो सोचिए क्या वह अमीर है.?? अब आते है इनकम टैक्स वाली बात पे इनकम टैक्स व्यक्तिगत इनकम पर लगती है अगर परिवार में 5 लोग है और पांचों इनकम टैक्स के दायरे में आते है तो सबको पे करना पड़ेगा. अब एक और बात बता दूं आपको अगर किसी की इनकम 5 लाख सालाना है तो उसे इनकम टैक्स के रूप में लगभग 10 हजार रुपये देने होते है. अब उस बात पे गौर करिये जो फैलाई जा रही है. क्या कमजोर सर्वणों लिए सालभर में 10 हजार रुपये जरूरी है या फिर 10% आरक्षण का लाभ लेकर अच्छी नौकरी और अच्छी शिक्षा पाना जरूरी है.?? आपके मन अब भी एक सवाल आ रहा होगा कि आखिर किस किस को लाभ मिलेगा किसको नही तो चलते चलते हम आपका एक और कंफ्यूजन दूर कर दें कि आखिर कितने सवर्ण 10% आरक्षण के दावेदार है.??

तो जान लीजिए 93.3% सवर्ण परिवारों ऐसे है की वार्षिक आय 01-2.5 लाख के बीच है. मतलब इतने लोगो को तो मिलना तय है. 6.28% सर्वण परिवारों की वार्षिक आय 2.5-50 लाख के बीच है. मतलब इनमें से भी आधे परिवार इस दायरे में आते है. मात्र 0.35% परिवारों की वार्षिक आय पचास लाख से ज्यादा है, जो इस दायरे में नहीं आयेंगे. अब आप समझ गए होंगे कि इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा सर्वणों को मिलने वाला है. जो इसके लाभ से वंचित होंगे उनकी संख्या बहुत कम है लगभग 2 करोड़. तो कुछ सेलेक्टिव खबरे दिखाने वाली मीडिया और नेताओं की बातों में न आये. सवर्ण आरक्षण का लाभ बहुत व्यापक है. समावेशी समाज के लिए मोदी सरकार के उठाये गए इस कदम का स्वागत होना चाहिए.

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