5 सालों में बढ़ा या घटा भ्रष्टाचार

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करप्शन को लेकर अपने टीवी चैनलों पर काफी डिबेट देखें होंगे ..कि कैसे पोलिटिकल पार्टियों के स्पोक पर्सन सिर्फ करप्शन के नाम पर बस एक दुसरे पर कैसे इल्जाम लगते रहते है ..कि हमारे टाइम पर करप्शन रेट कम था ..आपके टाइम में बढ़ रहा है ..आपकी पालिसी में ये खराबी है ….तुम्हरी में ये थी …और भी कई ऐसी बातें होती है ….पर इन डिबेटस का कोई हल तो निकलता नहीं है ….पर आज हम आपको दिखाते है ..करप्शन के ऊपर एक ऐसी रिपोर्ट जो पहली नज़र में देखने पर.. भले ही मामूली लगे, लेकिन इस सिक्के के और भी पहलू हैं….दरअसल इंटरनेशनल एजेंसी ‘ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International)’ हर साल सभी देशों की एक सूची जारी करता है, जिससे यह पता चलता है कि किस देश में कितना करप्शन है..बकायदा इसके लिए सभी देशों को एक रेटिंग दी जाती है, जिसके घटने या बढ़ने से पता चलता है कि करप्शन कम हुआ या बढ़ा है। जिस देश का स्कोर जितना ज्यादा होगा, वह उतना कम भ्रष्ट होगा.. जिस देश का रैंक जितना नीचे होगा, वहाँ ज्यादा करप्शन होगा… तो चलिए पहले आपको दिखाते है .. ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल (TI) का इस साल का करप्शन एनालिसिस ग्राफ …


41 ‘Corruption Perceptions Index (CPI)’ स्कोर के साथ भारत ने अपनी रेटिंग में पिछले वर्ष (2017) के मुक़ाबले सुधार किया है..आपको यहाँ जानना बेहद जरूरी है की २०१७ में भारत का CPI स्कोर 40 था जिसमे 1 अंक का सुधार आया है… पहली नज़र में देखने में भले ही यह मामूली लगे, लेकिन 2013 के लिहाज से देखे तो इसमे काफी सुधार आया है. २०१३ में भारत का CPI स्कोर 36 था… यानी साफ़ शब्दों में कहे तो हमारे देश की में पूरी तरीके से फ़ैल चुके करप्शन को कम करने के लिए अब हमारा देश एक-एक सीढ़ी चढ़ रहा है। भारत में करप्शन की स्थिति कैसी थी,

इसका अंदाज़ा 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन से नापा जा सकता है.. 2013 में 94वें रैंक से भारत अब 78वें रैंक पर पहुँच गया है- यानी 16 स्थानों की छलांग मारी है .. आपको ये भी बताते है की 2013 ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने रिपोर्ट के बाद क्या बयान दिया और अब 2018 में क्या बोला गया है….2013 में भारत का ख़राब CPI स्कोर चिंताजनक स्तिथि में है …यहाँ करप्शन ने देवलोपमेंट को बांध कर रखा है…करप्शन ने पिछले बरसों में हिला कर रख दिया है .. अगर हम TI के दोनों बयानों की तुलना करें तो पता चलता है कि हमारे देश ने करप्शन के मुद्दे पर काफ़ी तरक़्क़ी की है…

जहाँ उस समय इंटरनेशनल एजेंसियाँ बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार की बात करती थी, अब २०१८ में भारत को पॉजिटिव नजरों से देखते हुए ऐसे देशों की सूची में रखती है, जिनका प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद है… जहाँ उस समय बात होती थी कि करप्शन ने ने देवलोपमेंट को बाध कर रखा है, अब यही एजेंसी भारत के प्रदर्शन को ‘महत्वपूर्ण सुधार’ बताती है…. ओए उस समय यही एजेंसी भारत को करप्शन को भारत से लड़ने में अन अबल समझती थी …अप आप समझ ही गए होंगे …. वही चीन का रैंक 87 है तो पकिस्तान 117वें स्थान पर है… दोनों ही देश भारत से पीछे हैं…. यह दिखाता है …कि एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में भारत अपने पड़ोसी देशों के मुक़ाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहा है….