तो इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने दी मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन

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जिस 2.77 एकड़ जमीन को लेकर 70 सालों से विवाद चला आ रहा था उसे सुप्रीम कोर्ट ने 1045 पन्नों के फैसले में निपटा दिया. कोर्ट ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन हिन्दुओं को सौंप दी लेकिन साथ ही मस्जिद निर्माण के लिए मुस्लिमों को भी 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया तो यूँ लगा कि कोर्ट ने सबको संतुष्ट कर दिया है लेकिन ऐसा था नहीं. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों को ये बात कचोट रही थी कि जब मामला 2.77 एकड़ जमीन का था तो मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन क्यों दी गई? कई लोग ये सवाल भी कर रहे थे कि जब ये साबित हो गया कि विवादित भूमि हिन्दू पक्ष का है तो फिर मुस्लिम पक्ष को जमीन देने का क्या औचित्य था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला यूँ ही नहीं लिया. कोर्ट ने इस फैसले में आर्टिकल 142 का उल्लेख करते हुए यह आदेश दिया.

अब आपको बताते हैं कि क्या है आर्टिकल 142? आर्टिकल 142 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त है जिसका प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट ऐसे आदेश दे सकता है जो इसके समक्ष लम्बे समय से पड़े किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिये आवश्यक हों. आर्टिकल 142 के जरिये सुप्रीम कोर्ट किसी भी लंबित मामले में पूर्ण न्याय के लिए पक्ष विशेष के लिए सम्बंधित निर्देश दे सकती है. सुप्रीम कोर्ट के दिए गए आदेश को सम्पूर्ण भारत संघ में तब तक सर्वोपरि माना जाएगा जब तक इससे संबंधित किसी अन्य प्रावधान को लागू नहीं कर दिया जाता है.

फैसले के पार्ट-पी के पॉइंट नम्बर 800 में कोर्ट ने लिखा है, विवादित भूमि पर हिन्दू पक्ष द्वारा प्रस्तुत किये गए दावे और साक्ष्य मुस्लिम पक्ष द्वारा प्रस्तुत किये गए दावे और साक्ष्य से ज्यादा मजबूत है. लेकिन मुसल्म पक्ष को वैकल्पिक जमीन देना आवश्यक है क्योंकि 22/23 दिसंबर 1949 को पहले मस्जिद को अपवित्र किया गया और बाद में 6 दिसंबर 1992 को उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया. किसी भी ऐसे देश में जो सेक्युलर और कानून के राज के प्रति वचनबद्ध है, ऐसी हरकत गैरकानूनी है. अगर यह अदालत इस चीज को नजरअंदाज कर देती है तो यह कानून की जीत नहीं होगी. यह न्याय नहीं कहा जाएगा यदि हम मुस्लिमों के अधिकार के बारे में नहीं सोचेंगे… संविधान कहता है कि सभी धर्मों और पंथों की सबके साथ बराबरी हो. अदालत को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए हम यह सुनिश्चत करते हैं कि जो गलत हुआ है उसे दुरस्त किया जाए. इसलिए हम आदेश देते हैं कि मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन अयोध्या में प्रमुख स्थान पर दी जाए. संविधान सभी धर्मों की समानता को अभिगृहीत करता है. सहिष्णुता और सहअस्तित्व हमारे राष्ट्र और लोगों की धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करता है.

अयोध्या मामले में आर्टिकल 142 का प्रयोग पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भोपाल गैस काण्ड पीड़ितों और जेपी बिल्डर्स और घर खरीदारों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए न्याय किया है.