असम में सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने चला था जो मास्टरस्ट्रोक वो कर गया बैकफायर, कांग्रेस ने सोचा भी नहीं होगा

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5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीदें केरल और असम से थी. दोनों ही राज्यों में पार्टी विपक्ष में बैठी थी इसलिए उसे उम्मीद थी कि सत्ता विरोधी लहर का उसे फायदा मिलेगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 35 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले असम में तो पार्टी ने सत्ता हासिल करने के लिए अपनी तरकश से हर तीर चलाये लेकिन वो सारे तीर हवा में ही जाया हो गए. मुस्लिम वोटों को अपने पाले में करने के लिए बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से गठबंधन किया. CAA का मुद्दा उठाया. लेकिन कुछ काम नहीं आया. वो बीजेपी को लगातार दूसरी बार सता में आने से नहीं रोक सकी. अब तक असम म लगातार सत्ता म आने का रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम ही था लेकिन अब भाजपा भी उस लिस्ट शामिल हो गई.

असम में कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए राहुल गाँधी और प्रियंका गांधी दोनों ने पूरा जोर लगाया. कई रैलियां की. CAA का मुद्दा जोरशोर से उठाया लेकिन इ सब मुद्दों पर उनका बदरुद्दीन अजमल की पार्टी से गठबंधन करना भारी पड़ गया. इस गठबंधन के खिलाफ बीजेपी ने जोरदार ध्रुवीकरण कराया और जिसका नतीजा कांग्रेस की हार के रूप में सामने आया. कांग्रेस ने जिस गठबंधन को मास्टरस्ट्रोक समझा उसी ने हिन्दू वोटरों को एकजुट कर दिया. क्योंकि बदरुद्दीन अजमल की छवि एक कट्टरपंथी की तरह है.

कांग्रेस -एआईयूडीएफ के गठबंधन से मुस्लिम वोटर तो कांग्रेस के पाले में गए लेकिन हिन्दू वोट एकजुट हो कर बीजेपी के हिस्से में आ गए. भाजपा ने इस गठबंधन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया. बांग्लादेश से बॉर्डर साझा करने की वजह से असम घुसपैठ की समस्या से भी दो-चार होता है. लिहाजा लोग CAA का मुद्दा भूल गए और भाजपा गठबंधन के पक्ष में गोलबंद हो गए. जब कांग्रेस ने चुनाव से पहले एआईयूडीएफ के सात गठबंधन का ऐलान किया था तब कांग्रेस के अन्दर भी विरोध के सुर उपजे थे. आने वाले वक़्त में कांग्रेस में महाभारत देखने को भी मिल सकती है. हो सकता है उसके कुछ विधायक पाला भी बदल लें.