अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए RBI ने किये बड़े ऐलान, इतने हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा

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कोरोना की वजह से दुनिया भर की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है. भारत की अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं है. यूँ कहें कि अर्थव्यवस्था कोरोनाग्रस्त हो गई है. अब कोरोनाग्रस्त अर्थव्यवस्था को सँभालने के लिए RBI सामने आया है. RBI ने आज प्रेस कांफ्रेंस किया और अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए कई बड़े ऐलान किये.

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया. बैंकों को राहत देने के लिए रिवर्स रीपो रेट को 4 पर्सेंट से घटाकर 3.75 पर्सेंट कर दिया गया और रीपो रेट को बरकरार रखा गया है. टार्गेटेड लांग टर्म रीपो ऑपरेशन के तहत RBI ने MFIs और NBFCs को 50 हजार करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया.

कोरोना की वजह से नाबार्ड, सिडबी और नैशनल हाउसिंग बैंको को सेक्टोरल क्रेडिट की कमी का सामना करना पड़ रहा है. उनकी मदद के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की मद दी जा रही है. इसमें 25 हजार करोड़ नाबार्ड के लिए, सिडबी के लिए 15 हजार करोड़ और 10 हजार करोड़ एनएचबी के लिए होगा. राज्यों की WMA लिमिट 60 पर्सेंट बढ़ा दी गई है। बढ़ी हुई लिमिट 30 सितंबर तक के लिए होगी.

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमारा मिशन है कोरोना की वजह से गिरती अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को थामा जा सके.’ उन्होंने कहा कि ग्लोबल जीडीपी में 9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है जो जापान और जर्मनी की जीडीपी के बराबर हो सकता है. लेकिन भारत की स्थिति बाकी देशों से बेहतर है. वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत की विकास दर अब भी पॉजिटिव रहने का अनुमान है.’ उन्होंने कहा कि भारत जी20 इकॉनमीज में सबसे ज्यादा ग्रोथ वाला देश हो सकता है.