NDTV के दफ्तर में लादेन की प्रतिमा को फोटोशॉप और साजिश बता रह थे रवीश कुमार लेकिन पोल खुली तो बेशर्मी पर उतर आये

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रविवार 1 मार्च को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई थी जिसमे NDTV के न्यूज रूम में चैनल के एक जर्नलिस्ट विष्णु सोम के टेबल पर ओसामा बिन ला’देन की एक प्रतिमा रखी थी. तस्वीरें वायरल हुई तो NDTV सवालों के घेरे में आ गया. लोगों ने उसकी धज्जियाँ उडानी शुरू कर दी. आखिर उसपर सवाल उठाया भी क्यों न जाए? हाल के वर्षों में चैनल की हरकतें ही ऐसी रही है. कभी चैनल द्वारा ISIS आ’तंकि’यों को एक्टिविस्ट कहा जाता है, तो कभी हि’जबु’ल मुजा’हिद्दी’न के आ’तंकि’यों को वर्कर कहा जाता है. चैनल की एक कर्मचारी ने तो पुलवामा ह’म’ले का जश्न मनाने वाला ट्वीट किया था जिस पर खूब बवाल हुआ था. पशु त’स्क’रों के लिए चैनल कैटल लिफ्टर शब्द का इस्तेमाल करता है. तो जर्नलिस्ट के टेबल पर ला’देन की तस्वीर देख कर हंगामा क्यों न मचाया जाए?

जब विष्णु सोम सवालों के घेरे में आये तो उन्हें बचाने के लिए खुद ब्रह्मांड के एकमात्र निष्पक्ष और इमानदार, मैग्सेसे अवार्ड विजेता पत्रकार रवीश कुमार सामने आये और उन्होंने 2 किलोमीटर लम्बा एक पोस्ट लिख डाला. उन्होंने विष्णु सोम के टेबल पर ला’देन की तस्वीर को फेक, फोटोशॉप और भाजपा आईटी सेल की सा’जिश बता कर खारिज कर दिया. ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने जामिया के पत्थ’रबा’जों के हाथ के प’त्थर को वॉलेट बता दिया था, जाफराबाद की सड़कों पर गो’ली चलाते शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा बताने की कोशिश की.

सबसे पहला पोस्ट

लेकिन यहाँ पर जेम्स बांड बनने के चक्कर में रवीश कुमार गलती कर गए और उनकी छीछालेदर हो गई. दरअसल रवीश कुमार ने ला’देन की प्रतिमा को फोटोशॉप बता कर खारिज तो कर दिया लेकिन उन्हें पता नहीं था कि खुद उनके साथी विष्णु सोम ये स्वीकार कर चुके हैं कि हाँ वो ला’देन की ही प्रतिमा है और उसे रूस से खरीद कर ले आये हैं.

रवीश कुमार के नौटंकी की पोल खुल गई. उनक वो 2 किलोमीटर लम्बा पोस्ट व्यर्थ हो गया लेकिन रवीश इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं है. उन्होंने बेशर्मी की चरम सीमा तक पहुँचते हुए ऑफिस में ला’देन की प्रतिमा को जस्टिफाई करने का प्रयास किया और इस कोशिश में वो अमेरिका- ता’लिबा’न और भी न जाने क्या क्या बातें कर के ला’दे’न की प्रतिमा को रखने को सही साबित करने का प्रयास करते रहे. इस चक्कर में उन्होंने 5 बार अपनी पुरानी पोस्ट को एडिट किया और 2 किलोमीटर लम्बी पोस्ट को और बढ़ा कर 5 किलोमीटर लम्बा कर दिया. लेकिन इलज़ाम अब भी आईटी सेल पर ही.

पांचवी बार एडिट की हुई पोस्ट

इतनी छाछालेदार के बाद भी रवीश कुमार हार मानने को तैयार नहीं. वो थेथरई पर उतर आये. वो जेम्स बांड बनने चले थे लेकिन बांड बनने के चक्कर में कुछ और बन कर रह गए.