रवीश कुमार की बेशर्मी देखिये, जाफराबाद में गो’ली चलाने वाले शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा साबित करने की करने लगे कोशिश

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कुछ हफ़्तों पहले जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में पुलिस कारवाई का एक वीडियो वायरल हुआ था. आपने भी वो वीडियो देखा होगा. उस वीडियो में यूनिवर्सिटी के छात्र पुलिस पर प’त्थरबा’जी कर रहे थे. साफ़ साफ दिख रहा था कि उ’पद्र’वी छात्रों के हाथों में प’त्थ’र हैं लेकिन alt न्यूज़ और रवीश कुमार ने छात्रों के हाथों के प’त्थर को वॉलेट/पर्स/बटुआ साबित करने की भरसक कोशिश की. रवीश कुमार ने तो अपने प्राइम टाइम में ALT न्यूज़ के तारीफों के पुल बंधते हुए कहा कि ALT न्यूज़ ने ही पत्रकारिता को बचा कर रखा हुआ है.

अब आते हैं 24 फ़रवरी पर, दिल्ली में CAA विरोधी प्रदर्शन सा’म्प्रदा’यिक हिं’सा में बदल गया. CAA विरोधी एक युवक भीड़ से निकल कर आता है और पुलिस पर ब’न्दूक तान देता है. हर किसी ने उस वीडियो को देखा, कई एंगल से देखा. पुलिस ने उसी पहचान शाहरुख़ के रूप में की जो मौजपुर का रहने वाला था. उसकी गिरफ्तारी भी हो गई. वो वीडियो इतना साफ़ था कि कोई इसे साबित नहीं कर सकता था कि शाहरुख़ के हाथ में ब’न्दू’क नहीं बल्कि पर्स/वॉलेट/बटुआ है. तो फिर उसे बचाने के लिए नया प्रपंच रचा गया. अगर शाहरुख़ के हाथों में ब”न्दू’क को पर्स साबित नहीं कर सकते तो शाहरुख़ का धर्म ही बदल दो. और फिर शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा साबित करने की कोशिश की जाने लगी और इसी कोशिश को कामयाब बनाने की मुहीम में जुट गए रवीश कुमार

24 फ़रवरी को दिन में शाहरुख़ ने गो’ली चलाई. 24 फ़रवरी को ही रात में मीडिया में ये खबर ब्रेक हुई कि उसका नाम शाहरुख़ है और वो गि’रफ्ता’र कर लिया गया है. उसके दो दिनों बाद 26 फ़रवरी को रवीश कुमार प्राइम टाइम ले कर आते हैं और शाहरुख़ को अनुराग साबित करने की कोशिश करते हैं.

अपने प्राइम टाइम में रवीश कहते हैं कि दिल्ली पुलिस कह रही है वो शाहरुख़ है लेकिन सोशल मीडिया पर उसे अनुराग मिश्रा बताया जा रहा है. अब रवीश कुमार कहते हैं कि दिल्ली पुलिस पर भरोस नहीं किया जा सकता क्योंकि JNU के गुं’डों को पकड़ नहीं पाई है, जामिया लाइब्रेरी को लेकर झूठ बोला इसलिए दिल्ली पुलिस की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि गो’ली चलाने वाला शाहरुख़ है.

मतलब रवीश कुमार सीधे सीधे कहना चाहते हैं कि सारी दुनिया झूठी है बस एक रवीश कुमार ही परम सत्यवादी है. रवीश कुमार खुद को राजा हरीशचन्द्र के अवतार जैसा समझते हैं. लेकिन रवीश कुमार के झूठ की कलई खुल गई. शाहरुख़ को अनुराग साबित करने की कोशिश की कलई खुल गई. क्योंकि जिस अनुराग मिश्रा का नाम लेकर शाहरुख़ को बचाया जा रहा था वो अनुराग मिश्रा खुद सामने आ गया. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और नवभारत टाइम्स के फैक्ट चेक में ये साबित हो गया कि गोली चलाने वाला अनुराग मिश्रा नहीं था.

जाहिर सी बात है रवीश कुमार तो किसी की नहीं मानेंगे. क्योंकि रवीश कुमार खुद के अलावा सबको गोदी मीडिया मानते हैं.