अमित शाह के जन्मदिन पर अपनी नफरत छुपा नहीं पाई राणा अयूब, किया जहरीला ट्वीट

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मंगलवार 22 अक्तूबर को गृह मंत्री अमित शाह का जन्मदिन था. देश भर से उन्हें बधाइयाँ मिल रही थी. कई प्रसिद्द हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की. हालाँकि कई लोग तो ऐसे भी थे जिन्होंने राजनितिक शिष्टाचार को ताक पर रख दिया औत्र उन्हें जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं नहीं दी, जैसे कि ममता बनर्जी, अरविन्द केजरीवाल.

लेकिन अमित शाह के जन्मदिन पर किसी के कलेजे में बहुत आग लगी हुई थी. जिसके कलेजे में आग लगी हुई थी उसका नाम है राणा अयूब. पेशे से जर्नलिस्ट हैं. उन्होंने एक किताब भी लिखी है “गुजरात फाइल्स” नाम से, जिसमे गुजरात दंगों और एनकाउंटर के बारे में कई मनगढ़ंत कहानियां हैं. खैर किताब पर हम बाद में बात करेंगे पहले बात करते हैं राणा अयूब के कलेजे में लगी आग पर.

अमित शाह के जन्मदिन पर राणा अयूब ज़ख़्मी नागिन सी तड़प उठी और ज़हर उगलने लगी. उन्होंने अमित शाह के जन्मदिन पर एक तस्वीर पोस्ट की. ये तस्वीर थी तहलका मैगजीन के कवर की. उसपर अमित शाह की तस्वीर बनी थी और लिखा था – Why Is This Man Still Free? हिंदी में कहें तो ये आदमी अब तक खुला क्यों घूम रहा है? इस तस्वीर के साथ राणा अयूब ने लिखा- तुम्हारे बर्थडे पर 9 साल पहले की ये कवर स्टोरी मैं तुम्हे डेडीकेट करती हूँ। याद दिलाने के लिए.

तहलका मैगजीन में अमित शाह पर ये कवर स्टोरी पब्लिश हुई थी साल 2010 में और इसे लिखा था राणा अयूब ने. उस वक़्त अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री हुआ करते थे. इस आर्टिकल के पब्लिश होने के दो हफ्ते बाद ही अमित शाह को गिरफ्तार कर लिया गया था.

जब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे उस वक़्त गुजरात में आतंक के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति थी. इस दौरान कई अपराधियों के एनकाउंटर हुए थे इनमे से इशरत जहाँ, सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति प्रमुख थे. सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को फर्जी एनकाउंटर बताकर अमित शाह को जेल भेजा गया था और उस दौरान देश के गृहमंत्री थे पी चिदम्बरम. उस दौरान पूरी कांग्रेस पार्टी और मीडिया का एक ग्रुप गुजरात, नरेंद्र मोदी और अमित शाह से नफरत करता था. अमित शाह जेल भेजे गए थे और नरेंद्र मोदी को भी जेल भेजने की पूरी तैयारी की जा चुकी थी.

लेकिन कहते हैं न, सब दिन होत न एक समान. समय का चक्र तेजी से घुमा. उधर राणा अयूब और कांग्रेस नफरत करती रही और इधर नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपनी जगह मजबूत करते रहे. अमित शाह हर मामले से बरी हो कर जेल से बाहर आये. कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई. नरेंद्र मोदी दो बार देश के पीएम बने और अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत के गृह मंत्री बन गए.

कभी अमित शाह को जेल भेजने वाले पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम आज खुद जेल में हैं और राणा अयूब के दिल में नफरत बरक़रार रही. राणा अयूब अब भी वही फ्रस्ट्रेटेड, ज़ख़्मी और नफरत करने वाली बनी हुई है. उनके दिल में वही ज़हर भरा हुआ है.

राणा अयूब ने गुजरात फाइल्स नाम की एक किताब भी लिखी जिसमे दंगे और एनकाउंटर्स का जिक्र था. एक केस में उस किताब को साक्ष्य बना कर पेश किया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने उसे काल्पनिक कहानियां बता कर कूड़ेदान में फेंक दिया.

राणा अयूब के दिल में नफरत 2002 से बरकरार है. ये नफरत तब और बढ़ी जब आतंकियों का गुजरात में एनकाउंटर होता रहा. ये नफरत तब और बढ़ गई जब कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया अमित शाह ने. राणा अपनी नफरत छुपा नहीं पाती. राणा का बस चले तो अमित शाह और नरेंद्र मोदी को सूली पर चढ़ा दें. लेकिन मिर्ज़ा ग़ालिब ने लिखा था,
हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले
.

ग़ालिब का ये शेर राणा अयूब पर खूब फिट बैठता है. हर ख्वाहिशें और हसरतें कहाँ पूरी होती है. राणा अयूब की भी ये हसरत और ख्वाहिश अधूरी रही इसलिए अक्सर वो ज़ख़्मी नागिन सी तड़प उठती है.