कश्मीर पर पत्रकार राणा अयूब ने सुनाई बिना सबूतों की मनगढ़ंत कहानियां

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आपने शाहरुख़ खान की फिल्म डर देखी है?, जिसमे शाहरुख़ खान, जूही चावला के प्रति obsessed हो जाता है, ऑब्सेशन वो अवस्था है जिसमे आप जो चीज चाहते हैं और अगर वो आपको नहीं मिलती तो आप पागल होने लगते है. कुछ इसी स्थिति से गुज़र रही है पत्रकार राणा अयूब. वो भी कुछ चाहती थी. लेकिन वो जो चाहती थी वो उन्हें नहीं मिला तो राणा अयूब भी धीरे धीरे पागलपन की सीमा तक पहुँचने लगी और वही सब हरकतें करने लगी जो जूही को न पाने के बाद शाहरुख़ करने लगते है.

अब आप सोचोगे कि राणा अयूब क्या चाहती थी? राणा अयूब साहिबा चाहती थीं, कश्मीर से आर्टिकल 370 न हटे लेकिन हट गया. राणा अयूब चाहती थी कि आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर जल उठे लेकिन नहीं जला. राणा अयूब चाहती थी कि कश्मीरी हाथों में पत्थर ले कर सड़कों पर आ जाएँ और पत्थरबाजी करने लगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तो राणा अयूब भी अजीब हरकतें करने लगी. आप सोचेंगे कि कैसी अजीब हरकतें तो आप उनका ये ट्वीट देखिये, “अभी अभी कश्मीर से लौटी हूँ, 12 साल के बच्चे को हिरासत में लिया गया और बुरी तरह पीटा गया. औरतों को बलात्कार की धमकियाँ दी जा रही है. युवा लड़के को बिजली का झटका दिया जा रहा है. परिवारों को पता नहीं उनके साथ क्या हो रहा है. ये वही सामान्य हालात हैं जिसके बारे आप (सरकार) बात कर रहे हैं, ये अब तक की सबसे बुरी स्थिति है घाटी की, जबसे मैंने देखा है.”

ऐसा लग रहा है राणा अयूब शायद टाइम ट्रेवल कर के 1942 में पहुँच गईं और नाजी कैम्प का भ्रमण कर के आ रही है या फिर शायद 1971 के पूर्वी पाकिस्तान में पहुँच गई और वहां से बांग्लादेशियों की दुर्दशा देख कर आ रही हैं. शायद वो 1990 में पहुँच गई और कश्मीरी पंडितों के साथ हुई भयावह घटनाएं देख कर आ रही हैं. कभी कभी तो ऐसा लगता है मानों वो गेम ऑफ़ थ्रोंस सीजन 8 के उस एपिसोड को देख कर आ रही हैं जिसमे डेनेरिस टारगेरियन के ड्रैगन ने पुरे किंग्स लैंडिंग को जला डाला था और उसके सैनिक किंग लैंडिंग की महिलाओं का बलात्कार कर रहे हैं. राणा अयूब के पास इन सवालों के जवाब नहीं है कि वो कौन से युग की कौन सी घटना देख कर आ रही. राणा अयूब के पास अगर कुछ है तो अपनी एक फिक्शनल दुनिया और उस फिक्शनल दुनिया से जुडी कहानियां. तभी तो राणा अयूब के दावों पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. पत्रकार तवलीन सिंह ने राणा अयूब के दावों पर सवाल उठाये.

तवलीन कहती हैं की ऐसी भयानक स्थिति तो 90 के दौर में भी नहीं थी, तो अब कैसे होगी. अगर तुमने वाकई उन बच्चों को देखा है जिन्हें पीटा गया और उन महिलाओं से मिली हो जिन्हें बलात्कार की धमकियाँ दी गई तो तुम्हे उनके नाम बताने चाहिए.

जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन भी राणा अयूब के दावों पर सवाल उठाते हैं, “सामान्यीकरण और अतिशयोक्ति से भरी घटना (जो मुझे यकीन है कि सुधारात्मक उपायों के लिए संज्ञान लिया गया है) को मानक के रूप में नहीं माना जा सकता है. संघर्ष के दौर में जुवेलाइन को जुवेनाइल कानून के अनुसार निपटा जा रहा है. एक चौंकाने वाली तस्वीर चित्रित करने की कोशिश है, जो वास्तव में मौजूद नहीं है.”

सामान्य भाषा में समझे तो इम्तियाज हुसैन कह रहे हैं कि ऐसी तो कोई घटना हुई नहीं. लेकिन जो हालात हैं ही नहीं उसे सनसनीखेज बना कर पेश किया जा रहा है. आरोपों के जवाब में राणा अयूब एक विडियो पोस्ट करती है जो धुंधली सी है. 17 सेकेण्ड के इस धुंधले से विडियो में एक महिला रोते हुए कह रही है “मेरा दर्द कम हो जाए इसलिए मैं कभी इधर भागती हूँ, कभी उधर भागती हूँ. जिसका बच्चा होगा वो इस दर्द को समझेगा.”

17 सेकेण्ड में महिला ये नहीं बताती कि उसे बलात्कार की धमकियाँ मिली. महिला ये नहीं बताती कि वो कश्मीरी है. महिला ये नहीं बताती कि उसके बच्चे को बिजली के झटके दिए गए. महिला ये भी नहीं बताती कि उसके 12 साल के बच्चे को भारत की सेना और पुलिस उठा के ले गई लेकिन राणा अयूब चाहती हैं कि चूँकि उन्होंने ये विडियो पोस्ट किया है तो उनकी बातों पर भरोसा कर लिया जाए. ऐसा थोड़े ही न होता है बहन कि “तुम दिन को अगर रात कहो तो हम भी रात कहेंगे, जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे.”

अगर आपको राणा अयूब के बारे में एक बात पता न हो तो बता दूँ कि इन्होने एक किताब लिखी थी “गुजरात फाइल्स”. इस किताब में गुजरात दंगों की कहानियां थी. इसके अलावा इस किताब में मोदी युग के गुजरात की कुछ और भी विवादित कहानियां थी. जुलाई 2019 में गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री हरेन पांड्या की हत्या की सुनवाई के दौरान राणा अयूब की किताब को साक्ष्य के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया तो आप जानते हैं कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने कहा, “राणा अयूब की पुस्तक की कोई उपयोगिता नहीं है. यह शंकाओ, अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित है और सबूत के तौर पर इसका कोई मूल्य नहीं है. किसी व्यक्ति की राय सबूतों के दायरे में नहीं आती है.”

राणा अयूब को फिक्शनल कहानियां लिखने में महारत हासिल है. अभी वो फिक्शनल ट्वीट लिख रही है. कुछ दिनों बाद अगर राणा अयूब इन्ही फिक्शनल ट्वीट के आधार पर “कश्मीर फाइल्स” नाम की किताब लांच कर दें तो ज्यादा चौंकिएगा नहीं. स्त्री फिल्म का डायलाग है “वो स्त्री है वो कुछ भी कर सकती है.” असल दुनिया में हकीकत ये है कि “वो लिबरल गैंग की सदस्य है, वो कुछ भी कर सकती है.”