“जो मेरे राम का नहीं, वो मेरे किसी काम का नहीं” ये कहते हुए इस नेता ने छोड़ दी शिवसेना

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सत्ता के लिए पार्टी बदलने वाले नेता तो बहुत देखे, बिकने से बचने के लिए रिसोर्ट में छुपते नेता बहुत देखे लेकिन आदर्शों, मूल्यों और विचारधारा बदलने की बजाये जो पार्टी छोड़ दे ऐसे नेता विरले ही होते हैं. पूर्व शिवसेना नेता रमेश सोलंकी ऐसे ही एक नेता है जिन्होंने उस वक़्त शिवसेना से अपना इस्तीफ़ा दे दिया जब पार्टी सत्ता के शिखर पर पहुँचने वाली है. उनका कहना है कि “जो पार्टी मेरे राम की नहीं वो मेरे किसी काम की नहीं.”

हिंदुत्ववादी राजनीति का दंभ भरने वाली शिवसेना ने चुनाव तो भाजपा के साथ मिलकर लड़ा लेकिन सत्ता के लिए उसने जब भाजपा को धोखा दे कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया तो रमेश सोलंकी का दिल टूट गया. रमेश सोलंकी शिवसेना के यूथ विंग युवा सेना से जुड़े थे. उन्होंने कहा कि उनकी अंतरात्मा और विचारधारा कांग्रेस के साथ काम करने की अनुमति नहीं देती है इसलिए वो पार्टी को छोड़ रहे हैं. रमेश सोलंकी ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये और अपनी भावनाओं का इजहार किया. उनके ट्वीट खूब वायरल हुए और सोशल मीडिया पर लोग उनकी काफी तारीफ़ कर रहे हैं.

रमेश सोलंकी ने क्या क्या कहा

इस्तीफ़ा देते हुए अपने पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मेरा इस्तीफा, मैं बीवीएस / युवासेना में अपने सम्मानित पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मैं उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे का शुक्रिया अदा करता हूँ कि उन्होंने मुंबई, महाराष्ट्र और हिंदुस्तान के लोगों के लिए काम और सेवा करने का अवसर दिया.”

उन्होंने आगे लिखा, यह साल 1992 में श्री बाला साहेब के निर्भीक नेतृत्व और करिश्मा की छत्रछाया में शुरू हुआ. 12 साल की उम्र में मैंने बालासाहेब की शिवसेना के लिए अपना दिल और आत्मा दे दिया. आधिकारिक रूप से वर्ष 1998 में मैं शिवसेना में शामिल हुआ.

और तब से बालासाहेब के हिंदुत्व की विचारधारा के साथ विभिन्न पदों पर अपनी क्षमताओं के साथ काम करते हुए हमने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. कई बीएमसी / विधानसभा / लोकसभा चुनाव आदि में केवल एक सपने और एक उद्देश्य के साथ काम किया है हिन्दू राष्ट्र और कांग्रेस मुक्त भारत.

लगभग 21 साल हो गए, कभी किसी भी पद या टिकट की मांग नहीं की. दिन और रात मैंने पार्टी के आदेशों का पालन करने में बिताया. शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाने का निर्णय लिया है.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने और सीएम बनने के लिए शिवसेना को बधाई और शुभकामनाएं. लेकिन मेरी आत्मा और विचारधारा मुझे कांग्रेस के साथ काम करने की अनुमति नहीं देती है. अगर मैं यहाँ रहा तो आधे मन से काम कर पाऊंगा और यह मेरे पद, मेरी पार्टी, मेरे साथी शिवसैनिक और मेरे नेता के लिए उचित नहीं होगा.

इसलिए मैं बहुत भारी मन के साथ पार्टी से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ. एक कहावत है कि जब जहाज डूबता है तो सबसे पहले चूहे भागते हैं लेकिन मैं बुलंदियों पर पार्टी को छोड़ कर जा रहा हूँ. मैं तब छोड़ कर जा रहा हूँ जब पार्टी सरकार बनाने वाली है. मैं अपने आदर्शों और विचारधारा को साथ लेकर पार्टी से निकल रहा हूँ. जो मेरे श्री राम का नहीं है ( Congress ) वो मेरे किसी काम का नहीं है.

रमेश सोलंकी के ये ट्वीट खूब वायरल हो रहे हैं और उन्हें सलाम कर रहे हैं कि जिस शिवसेना को बाला साहेब ने बनाया था उस शिवसेना का सच्चा और आखिरी सिपाही आज निकल गया. वाकई आज जिस तरह की राजनीति होती है उस माहौल में रमेश सोलंकी जैसा नेता मिसफिट है और विरले हैं.