राम मंदिर मुददे में आया नया मोड़ – बाबर जब अयोध्या गया ही नहीं तो बाबरी मस्जिद केसी?

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अयोध्या एक ऐसा धार्मिक ,राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक जगह है जिसपर बात किये बिना कोई राजनेता राजनीति नही करता और राजनीति है तो अयोध्या का मुददा भी है . यह मुददा कई सालो से आज तक विवाद मैं है . इस विवाद का मुददा राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर है जिसपर सुप्रीम कोर्ट मे हिन्दू और मुस्लिम पक्षकार दिन प्रतिदिन अपनी दलील पेश कर रहें है ऐसा ही कुछ खुलासा सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की 13वे दिन की कार्यवाई में किया गया .

सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाई के दौरान हिन्दू पक्ष के वकील ने कहा कि बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं था और मीर बाकी जैसा कोई शख्स नहीं था और उस जगह पर दो शिलालेख पाए गए थे जिनपर मस्जिद की तारीख अलग-अलग है और बेकर की किताब में मंदिर का नक्शा भी है और सात पिलर की पंक्तियां भी मिली थीं और तो और निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने कहा, ‘कल आपने जो कहा, उसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा का रुख यह है कि वह वाद संख्या 5 की विचारणीयता के मुद्दे पर जोर नहीं देगा बशर्ते कि देवता के वकील भी अखाड़ा के शबैत अधिकारों को चुनौती न दें.’. उन्होंने ने कहा कि 1934 से किसी मुस्लिम ने नमाज के लिए विवादित इमारत में प्रवेश नहीं किया था और यह स्थान अखाड़े के कब्जे वाला मंदिर है. और मुस्लिम पक्ष की इस दलील को नहीं माना जा सकता कि 1934 में सांप्रदायिक दंगे के बाद विवादित ढांचे की मरम्मत के लिए एक ठेकेदार को कहा गया था।

पी एन मिश्रा ने जिस हंस बेकर की एक पुस्तक का जिक्र किया है उसमे भगवान राम के जन्मस्थान एक नक्शे को भी दिखाया . मुस्लिम पक्ष ने नक्शे को विसंगतियो हिस्सा बताया..इस पर पी एन मिश्रा ने कहा कि यह रेकार्ड का हिस्सा है क्योकि इसका किताब मे उल्लेख है और जब वहा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने खुदाई कार्य किया तो सात पिलर दिखाई दिए और हिंदू परंपरा के अनुसार कुल 85 पिलर वहां थे. उन्होंने कहा कि,‘मैंने उच्च न्यायालय में साबित किया है कि फर्जी शिलालेख लगाए गए।’ उन्होंने कहा कि जो दो शिलालेख मिले है उनमें मस्जिद के निर्माण का समय अलग है. अब इस पर सुनवाई बुधवार को होगी देखना है की फैसला किसके पक्ष मे और कब आता हैं