26/11 का वो दिन आप भूले नहीं होंगे जब मुंबई पर आ’तंकि’यों ने क’हर बरपाया था. इस घटना के 12 साल बीत चुके हैं लेकिन लोगों के स्मृति पटल पर आज भी ये घटना एक काले अध्याय के रूप में अंकित है. कांस्टेबल तुकाराम आम्बले ने अपनी जा’न पर खेल कर अजमल आमिर कसब को जिं’दा पकड़ा था. जरा सोचिये कि अगर उस दिन तुकाराम आम्बले ने कसाब को ज़िं’दा न पकड़ा होता और कसाब पुलिस मु’ठ’भेड़ में म’र गया होता तो क्या होता? पूरी दुनिया यही मान कर बैठ जाती कि ये ह’मला किसी हिन्दू संगठन ने किया था. पूरी दुनिया ये मान लेती कि ये ह’मला एक हिन्दू आ’तंक’वाद था.

12 साल बाद इस घटना के बारे में कई अहम खुलासे हुए हैं और ये खुलासे किये हैं मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी पुस्तक ‘Let Me Say It Now (लेट में से इट नाउ)’ में. उन्होंने अपनी किताब में खुलासा किया है कि 26/11 की सा’जिश रचने वाले आ’तंकी संगठन ल’श्कर-ए-तो’एबा ने पूरी तैयारी कर रखी थी इस ह’मले की जिम्मेदारी भारत के हिन्दू संगठनों पर मढने की. इसके लिए कसाब की कलाई पर हिन्दुओं का पवित्र कलावा बांधा गया. कसाब की आईडी बनाई गई समीर दिनेश चौधरी के नाम पर और उसे बेंगुलुरु निवासी बताया गया.

पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि ‘अगर लश्कर का प्लान सफल हो जाता तो सारे अखबार और टीवी चैनल चीख चीख कर कहते कि कैसे हिंदू आ’तंक’वादियों ने मुंबई पर ह’मला किया. लेकिन, साजिश पर पानी फिर गया. कसाब ज़िं’दा पकड़ा गया और पाकिस्तान के फरीदकोट का अजमल आमिर कसाब निकला.’