रक्षा मंत्री बनते ही राजनाथ सिंह सबसे पहले करेंगे ये काम

686

राजनाथ सिंह भाजपा के सबसे कदावर नेताओं में से एक है और देश को नए रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह मिल गए है , जोकि पहले भारत के होम मिनिस्टर थे ,राज नाथ सिंह को लोग उनके सटीक फैसलों के लिए और साफ़ बोलने के लिए खूब सराहते है ,राज नाथ सिंह होम मिन्स्टर होते हुए भी समय समय पर देश के जवानों और सेना प्रमुखों से मिलते ही रहते थे ,तो उन्हें सेना की जरूरतों का भी काफी अच्छे से पता है और उनके मिशन में आने वाली प्रोब्लम का भी उन्हें पता है साथ ही क्या आधुनिकरण की जरूरत है उन्हें इसके बारे में भी सब पता है और राजनाथ सिंह जैसे अनुभवी और मजबूत नेता के रक्षा मंत्रालय संभालने से इस क्षेत्र में नए बदलावों के आने की संभावना मजबूत हुई है,तो आज हम उन्ही बदलावों पर आपसे कुछ बात करेंगे.

Image result for rajnath singh

सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए उठाए जायेंगे ठोस कदम

आतंकवाद से निपटने के लिए नए रक्षा मंत्री बने राजनाथ सिंह को कुछ ठोस कदम उठाने पड़ेंगे, क्योंकी आतंकी घटनाओं पर पहले के मुकबले लगाम तो लगी गए है लेकिन इसको जड़ से ख़त्म करने के लिए कुछ नए नीतियाँ बनानी पड़ेंगी,क्यों की धीरे धीरे आतंक अपने पैर हिंदुस्तान से लगने वाली सीमाओं पर अपने पसारना चाह रहा है..तो इसको जड़ से ख़त्म करने के लिए कुछ नई नीतियों के साथ काम करना होगा..वैसे भारत की कूटनीति की वजह से पाकिस्तान इंटरनेशनल लेवल पर पहले अलग थलग हो चूका है.

राजनाथ सिंह के आने के बाद रक्षा क्षेत्र में मैनेजमेंट के स्तर पर भी बदलाव आ सकेंगे

वैसे केंद्र सरकार रक्षा के मामले में चूक नहीं छोड़ रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर वो काफी गंभीर है ,और जरुरत पढने पर समय पर रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए केंद सरकार कुछ जरूरी कदम भी उठाए थे लेकिन अगर एक सकारत्मक बदलाव रक्षा क्षेत्र में देखना है तो पूरे देश के डिफेंस मैनेजमेंट में आ बदलावों की जरूरत है… पिछले पांच सालों में रक्षा मंत्रालय पहले मनोहर पर्रिकर और फिर निर्मला सीतारमन के हाथों में थे ,इन्होने भी अपने टाइम पर कई ठोस कदम उठाये ,पर अब रक्षा मंत्रलाय राजनाथ सिंह के हाथों में है, और उन्हें ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए अच्छा-खासा अनुभव और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है..

सेना के पास युद्ध की स्थिति में होंगे पर्याप्त हथियार

कार्य भार के बाद राजनाथ सिंह का पहला काम सैनिकों और जवानों को हथियारों की आपूर्ति करना होगा ,ताकि अगर युद्ध के स्थिति बने तो उनके पास लम्बे समय तक डटे रहने के लिए पर्याप्त हथियार हों..जिससे वो दुश्मनों को मुह तोड़ जबाव दे सकें… और तो और उन्हें भारतीय सेना के पास रणनीति बना कर जरूरी पनडुब्बियों, फाइटर प्लेन, हेलिकॉप्टर, की व्यवस्था भी रखनी होगी ,ताकि इसकी कमी की वजह से हमारी सेना को कोई खामयाज़ा ना भुगतना पड़े और सेना प्रमुखों और जवानों के साथ मिल कर ये काम करनी में राजनाथ सिंह को जयादा मुश्किल नहीं होगा.

रक्षा के मुद्दे पर दुसरे देशों से भी बनानी होगी दोस्ती..

पडोसी प्रथम की निति के अनुसार वैसे ही हमारी सरकार अपने पडोसी देशों से अपने रिश्ते मजबूत करने में लगे हुए है,और पाकिस्तान का द्वारा wing कमांडर अभिनंदन को महज ६० घंटों में छोड़ना भारत की कुटनीतिक जीत थी,क्यों की पाकिस्तान को आतंक के मुद्दे पर भारत ने इंटरनेशनल लेवल पर अलग थलग कर दिया है पूरी तरह..पर इसके साथ साथ नए रक्षा मंत्री बने राजनाथ सिंह को इजरायल जैसे मजबूत देशों के साथ भी अपनी साझेदारियां और मजबूत करनी होंगीं…

क्यों की वो रक्षा मंत्री का देश के ऐसे समय पर बने है, जब भारत ने कुछ टाइम पहले ही पाकिस्तान के अंदर घुस कर बालकोट में एयर स्ट्राइक की थी , जिसमें आतंकवादी शिविरों को तवाह कर डाला था ,पर अब सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए भारत नए नीति बना कर आगे भी चलेगा…जिसमें अब राज नाथ सिंह की सूझ बूझ होगी .