अयोध्या मंदिर का ताला खुलवाने में राजीव गाँधी की क्या थी भूमिका? पढ़िए पूरी कहानी

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शनिवार को पूरे देश की नजरें भारत के सुप्रीम कोर्ट की तरफ थी कि आखिरकार भारत की सर्वोच्च अदालत राम मंदिर के मामले में क्या फैसला सुनाती है..  सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने के भीतर राममन्दिर निर्माण के लिए ट्रस्‍ट बनाये साथ ही साथ मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है. हालाँकि अयोध्या से जुड़े कई किस्से प्रचलित हैं इन्ही में से एक किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी से जुड़ा हुआ है. दरअसल लोगों को बात करते हुए आसानी से सुना जा सकता है कि राम मंदिर का ताला 1986 में राजीव गाँधी के कहने पर खोला गया था लेकिन अगर कुछ तथ्यों के हिसाब से बात करे तो कहानी कुछ और ही है.. वो आपको भी जानना जरूरी है तो चलिए इसी पर बात करते है..

दरअसल न्यूज़ 18 इंडिया में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक़ आयोध्या पर करीबी नजर रखने वाले जनमोर्चा अखबार के संपादक शीतला सिंह ने बताया कि जब उनकी मुलाक़ात राजीव गाँधी से से हुई थी उस वक्त खुद राजीव जी ने कहा था कि राम मंदिर का ताला खुलवाने में उनकी कोई भूमिका नही है.. जब राजीव जी की कोई भूमिका नही थी तो आखिर ताला खुला कैसे और खोला किसने? इस बारे में इलाहाबाद के सीजेएम रहे सीडी राय बताते हैं कि 1986 में यह मामला तत्‍कालीन जिला जज केएम पांडे की अदालत में लंबित था.

अयोध्‍या और आसपास के लोगों को उम्‍मीद थी कि जल्‍द ही मामले में फैसला आ जाएगा. ऐसे में अयोध्या में भीड़ भी थी.जस्टिस पांडे ने भी फैसला सुनाने से पहले पूरी तैयारी की. बैठक के लिए पुलिस प्रशासन और डीएम के साथ बैठक हुई. फैजाबाद के तत्‍कालीन जिलाधिकारी इंदु कुमार पांडे और पुलिस अधीक्षक कर्मवीर सिंह से कानून व्यवस्था की जानकारी ली गयी. दोनों की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद जस्टिस पाण्डेय ने इसे लिखित में देने के लिए. दोनों अधिकारियों के लिखित आश्वासन मिलने के बाद अदालत ने 1 फरवरी 1986 को शाम 4.40 बजे फैसला सुनाया…

केएम पाण्डेय ने राम मंदिर खोलने का फैसला सुनाया और साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गये कि जितना समय यहाँ से मंदिर पहुँचने में लगता है उतने समय में मंदिर का ताला खोल दिया जाए… मतलब पुलिस के आस वक्त बहुत कम था..लेकिन लेकिन पुलिस के वहां पहुँचने से पहले ही हजारों लोगों की भीड़ मंदिर के आस पास पहुँच चुकी थी और मंदिर का ताला तोड़ कर लोग अंदर घुस चुके थे. इस तरह ये पता ही नही चल सका कि ताला आखिर किसने तोडा या किसने किसने खोला. पुलिस ने भी जांच पड़ताल नही की क्योंकि ताला फैसले आने के बाद ही खोला गया था. हालाँकि इसे राजीव गाँधी से भी जोड़कर बहुत लोग देखते हैं.
हालाँकि अब तो कोर्ट का फैसला आ ही गया है और विवादित जमीन पर मंदिर बनाने का आदेश दिया गया है और मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन सरकार को देने का भी आदेश चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की तरफ से दिया गया है.