मध्य प्रदेश गंवाने के बाद अब कांग्रेस पर आई नयी आफत, राजस्थान बचाने की शुरू हुई कोशिश

516

अभी तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के दिए झटके से उबर भी नहीं पायी है कि उसकी टेंशन राजस्थान को लेकर बढ़ने लगी है. राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव मध्य प्रदेश के साथ ही हुई थी. और चुनाव परिणाम आने के बाद से ही दोनों ही राज्यों में कांग्रेस के लिए मुश्किलें शुरू हो गई थी. दोनों ही राज्यों में हालात बिलकुल एक जैसे थे. जैसे मध्य प्रदेश में युवा ज्योतिरादित्य को नज़रअंदाज कर कमलनाथ को कमान सौंपी गई. ठीक उसी तरह राजस्थान में युवा सचिन पायलट को दरकिनार कर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया गया.

राजस्थान में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही सचिन पायलट गुट नाराज है. सचिन पायलट गुट वाले विधायक लम्बे वक़्त से अशोक गहलोत से असंतुष्ट है. उनकी शिकायत है कि सरकार में उनकी नहीं सुनी जाती और उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है. मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जो कदम उठाया उसे देख सचिन पायलट भी कुछ ऐसा ही कदम उठा सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस के सामने अपना राजस्थान का किला बचाने की चुनौती होगी. पायलट राजस्थान की अपनी ही सरकार पर कई बार निशाना साध चुके हैं. वह ये भी कह चुके हैं कि सत्ता में कार्यकर्ताओं की भागीदारी नहीं है. अब मध्य प्रदेश गँवा चुकी कांग्रेस राजस्थान को किसी भी कीमत पर बचाना चाहती है.

मध्य प्रदेश जैसे हालात राजस्थान में पैदा न हो इसलिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने अशोक गहलोत को दिल्ली बुलाया और उन्हें आदेश दिया कि राज्य में जो भी अंदरूनी गुटबाजी है उसपर लगाम लगाया जाए. मध्य प्रदेश में सत्ता और ज्योतिरादित्य जैसे नेता को गंवा कर कांग्रेस और गाँधी परिवार की जो फजीहत हुई है उसे कांग्रेस फिर से दोहराने की स्थिति में बिलकुल भी नहीं है.