राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान में चढ़ा सियासी पारा, कांग्रेस के विधायकों की मीटिंग दो बार करनी पड़ी कैंसल

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राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान का सियासी पारा चढ़ गया है. गुजरात में पहले से ही परेशानियों में घिरी कांग्रेस की धड़कने अब राजस्थान में तेज हो गई. हालात इतने बिगड़ गए कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को रिजॉर्ट में छुपा दिया और सादी वर्दी में पुलिसकर्मी भी तैनात कर दिए ताकि विधायकों को बहकाने के लिए कोई विरोधी रिजॉर्ट में न जा सकें. इसके अलावा विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिजॉर्ट में पार्टी के आला नेताओं और विधायकों की मीटिंग भी बुलाई गई थी लेकिन दो बात मीटिंग का समय परिवर्तित करने के बाद मीटिंग कल के लिए टाल दी गई. कारण बताया गया कि केसी वेणुगोपाल नहीं पहुँच पायें. इसलिए मीटिंग कल होगी.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वो पार्टी में तोड़फोड़ मचाने की कोशिश का रही है लेकिन कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं. अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यसभा चुनाव की घोषणा होते ही गुजरात में 4 विधायकों के इस्तीफे की घोषणा हो गई. मैं राजस्थान में कोई भी षड्यंत्र कामयाब नहीं होने दूंगा. सरकार का मुखिया होने के नाते जिम्मेदारी मेरी है. अशोक गहलोत ने ये भी आरोप लगाया कि इस षड्यंत्र में राज्य के नेताओं के अलावा केंद्र के नेता भी शामिल हैं.

राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 19 जून को मतदान होना है. कांग्रेस ने दो उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी को मैदान में उतारा है, जबकि बीजेपी ने भी दो उम्मीदवार- राजेंद्र गहलोत और ओमकार सिंह लखावत को मैदान में उतार कर चुनाव को रोचक बना दिया है. यूँ तो भाजपा एक ही उम्मीदवार को जिता सकने की स्थिति में है. लेकिन उसने दो उम्मीदवारों को उतार कर कांग्रेस की नींद उड़ा दी है. बीजेपी के पास 72 विधायक हैं और उसे आरएलपी के तीन विधायकों का समर्थन प्राप्त है. जबकि कांग्रेस को अपने 107 विधायकों के अलावा आरएलडी के एक विधायक और निर्दलीय 13 विधायकों, बीटीपी और माकपा के विधायकों का समर्थन प्राप्त है.