चीन को आर्थिक चोट देने के लिए रेलवे ने उठाया बड़ा कदम, चीनी कंपनी का 471 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट किया रद्द

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भारत अब चीन के साथ आर पार के मूड में आ गया है. भारत जानता है कि वो चीन का सबसे बड़ा बाज़ार है और चीन को सबक सिखाने के लिए सिर्फ सैन्य स्तर पर ही नहीं बल्कि आर्थिक स्तर परभी चोट करनी होगी और इसके लिए अब सरकार ने ऑफिशियल तौर पर बायकॉट चाइना मुहीम को लॉन्च कर दिया है. पहले तो टेलिकॉम मंत्रालय ने BSNL और MTNL को आदेश दिया कि चीनी उपकरणों को बाय बाय किया जाए. साथ ही  देश के 5G डिप्‍लॉयमेंट्स के लिए चीनी ब्रांड्स Huawei और ZTE को प्रतिबंधित कर दिया गया है. टेलिकॉम मंत्रालय के बाद अब बारी है रेलवे की. रेलवे ने भी बायकॉट चाइना का ऐलान कर दिया है और इसके तहत एक चीनी कंपनी को दिया गया ठेका रद्द कर दिया गया है.

भारतीय रेलवे ने चीन की कंपनी बिजिंग नैशनल रेलवे रिसर्च ऐंड डिजाइन इंस्टिट्यूट ऑफ सिग्नल ऐंड कम्युनिकेशन लिमिटेड को दिए कॉन्ट्रैक्ट को कैंसल कर दिया है. इस कंपनी को कानपुर-दीन दयाल उपाध्याय सेक्शन को बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. यह करीब 417 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर है. चीनी कंपनी को जून 2016 में 471 करोड़ में ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. लेकिन इतने सालों बाद भी सिर्फ 20 फीसदी काम ही हुआ.

रेलवे की तरफ से कहा गया कि कंपनी अग्रीमेंट के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट को लेकर टेक्निकल डॉक्युमेंट जैसे लॉजिक डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग नहीं जमा की है. साथ ही साइट पर कंपनी का कोई इंजिनियर या अधिकारी भी उपलब्ध नहीं होता थे. रेलवे की तरफ से कहा गया कि ऐसा लगता है जानबूझ कर इस प्रोजेक्ट में देरी की जा रही है क्योंकि इतने साल बीत जाने के बाद भी अब तक चीनी कंपनी ने किसी लोकल कंपनी के साथ कोई करार नहीं किया. रेलवे ने कई बार कंपनी की अधिकारियों सांग बैठक कर इन समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाया लेकिन कंपनी टालमटोल वाला रवैया अपनाती रही.