कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ने सोचा भी नहीं होगा कि उनके साथ से मध्यप्रदेश भी चला जायेगा. एक के बाद एक झटके झेल रही कांग्रेस को सिंधिया ने बड़ा झटका देते हुए पार्टी से अलविदा कह दिया है. राहुल और सोनिया ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सिंधिया कांग्रेस छोड़ देंगे.

जानकारी के लुए बता दें कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गये हैं. सिंधिया ने पार्टी छोड़ने के बाद कई बड़े आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा है कि पार्टी में उन्हें लगातार दरकिनार किया जा रहा था. कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी. वहीं गाँधी परिवार इन सभी आरोपों को खारिज कर रहा है. राहुल गाँधी ने कहा था कि सिंधिया ही एक ऐसे शख्स थे जिनके लिए उनके घर के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे. कांग्रेस हाईकमान के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार ये बताया गया कि पारिवारिक निकटता के चलते सोनिया और राहुल को ऐसी कभी उम्मीद नही थी सियासी खींचतान सिंधिया पार्टी छोड़ने का बड़ा फैसला ले लेंगे.

सिंधिया को लेकर कहा गया कि मध्यप्रदेश की अंदरूनी खींचतान का समाधान निकालने के लिए सिंधिया को कोई विकल्प नही दिया गया. सूत्रों का ये भी कहना है ये कि फरवरी के आखरी हफ़्ते में विदेश दौरे के लिए रवाना होने से पहले सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ जारी तनातनी को खत्म करने के लिए राहुल गाँधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से सीधे बातचीत की थी इतना ही नहीं राहुल सिंधिया को अपने साथ बाहर लंच पर भी ले गये थे, जहाँ उनकी लंबी बातचीत भी हुई.

गौरतलब है कि जागरण में छपी एक खबर के अनुसार ये भी बताया गया कि लंच के दौरान राहुल ने सिंधिया को राज्यसभा उम्मीदवार बनाये जाने का भरोसा भी दिया था. राहुल के इस आश्वासन के बाद भी उन्हें संतुष्टि नहीं हुई. सिंधिया को इस बात का यकीन था कि दिग्विजय और कमलनाथ मिलकर सूबे की सियासत में उनको किनारे लगाने का काम करेंगे. इतना ही नहीं बाद में सोनिया गाँधी ने सिंधिया को बुलाकर मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया. इसमें भी सिंधिया को रूचि नही थी और उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला ले लिया.