प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को दी ये सलाह, बताया कैसे निपटें कोरोना से

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लॉकडाउन की समय सीमा 19 दिन बढ़ने के बाद आज राहुल गाँधी ने विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये एक प्रेस को संबोधित किया. ऐसा पहली बार हुआ कि राहुल गाँधी ने सीधे सीधे सरकार की आलोचना नहीं की. हालाँकि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की नीतियों को असफल ठहराते हुए सरकार को नसीहत दी. उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह आलोचना का वक्त नहीं है लिहाजा वह सरकार को रचनात्मक सुझाव दे रहे हैं. राहुल ने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है, अगर हिंदुस्तान एक होकर लड़ा तो इस वायरस को हरा देंगे. अगर हम बंट गए तो वायरस जीत जाएगा, इसलिए सभी एकजुट हो.’

लॉकडाउन के एक्सटेंड होने पर उन्होंने कहा, ‘लॉकडाउन वायरस का कोई हल नहीं है. यह सिर्फ एक पॉज बटन है. लॉकडाउन हुआ तो बात बनी नहीं बल्कि पोस्टपोन हुई है. जैसे ही लॉकडाउन हटेगा, कोरोना के मामले बढ़ेंगे. ऐसे में हमें कोरोना को रोकने के लिए रणनीति बनाकर काम करना होगा. टेस्टिंग ज्यादा करनी होगी. साथ ही मेडिकल सुविधाओं को बढ़ाना होगा, ताकि कोरोना से निपटा जा सके.’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्य सरकारों और जिला प्रशासन की मदद करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उन इलाकों में भी टेस्टिंग करनी पड़ेगी जहाँ कोरोना का एक भी केस नहीं है.

लोकसभा चुनाव हुए दो साल होने को हैं लेकिन राहुल गाँधी अब तक अपनी न्याय योजना को नहीं भूले हैं. उन्होंने आज सरकार को सलाह देते हुए कहा कि सरकार को कांग्रेस की न्याय योजना को अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा गरीबों के खाते में डायरेक्ट पैसे भेजिए. उन्हें अनाज दीजिये. जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें भी अनाज दीजिये. ये कहते हुए राहुल गाँधी शायद भूल गए कि सरकार ने राहत पैकेज का ऐलान किया था और उसके अनुसार सबके जनधन अकाउंट में पैसे डाले जा रहे हैं और सबको तीन महीने तक मुफ्त अनाज भी दिया जा रहा है. लेकिन राहुल गाँधी को अपने न्याय योजना के अतिरिक्त और कुछ दिखता ही नहीं. या देखने को तैयार ही नहीं हैं.