सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन को लेकर राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को चाहा घेरना लेकिन खुद ही फंस गये

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अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों और जवान फिसलने को लेकर चर्चा में बने रहने वाले कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की भी मुश्किलें थमने का नाम नहीं लेती हैं. उनका एक बयान ठंडा पड़ता नहीं है कि वह फिर दूसरा दे देते हैं और फिर लोगों के निशाने पर आ जाते हैं. ऐसा ही एक बार फिर हुआ है जब राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को घेरना चाहा लेकिन वह खुद ही घिर गये.

जानकारी के लिए बता दें राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में एक ट्वीट कर डाला जिसमें उन्होंने मनमोहन सरकार को ही कोस डाला. दरअसल मामला सेना में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन पाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से जुड़ा हुआ था. उच्च न्यायलय ने हाईकोर्ट के फ़ैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि ‘केंद्र कॉम्बैट क्षेत्र को छोड़कर सेना में सभी विभागों में महिलाओं को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य है.

कोर्ट के इस फ़ैसले पर राहुल गाँधी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा कि ‘सरकार ने हर भारतीय महिला का अपमान किया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महिला आर्मी अधिकारी कमांड पोस्ट और परमानेंट सर्विस के लिए योग्य नहीं हैं, क्योंकि वे पुरुषों से कमतर हैं. अब मैं भारतीय महिलाओं को मुकाबला करने और बीजेपी सरकार को गलत साबित करने पर बधाई देता हूं.’

अब राहुल गाँधी अपने इस बयान के चलते जमकर ट्रोल हो रहे हैं क्योंकि इसके पीछे की वजह ये है कि ये मामला कांग्रेस की सरकार के समय का है. वह ये भूल ही गये कि ये मामला उनकी ही सरकार है बस मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में खुद ही घिर गये. बता दें तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के समय में साल 2010 में कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें महिला अधिकारियों के स्थायी कमीशन की बात थी. साल 2010 में हाईकोर्ट ने शार्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में आने वाली महिलाओं को 14 साल पूरे करने पर स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था, जिसपर मनमोहन सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि पुरुष सैनिक महिला सैनिक को स्वीकार नहीं कर पाएंगे क्योंकि यूनिट में पूरी तरह से पुरुष वर्ग ही ज्यादा है.

गौरतलब है कि अब बीजेपी ने राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर जमकर घेरा है. बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा “महिलाओं के लिए स्थायी कमिशन के आइडिया को पीएम मोदी ने सपोर्ट भी किया था और 2018 में लाल किले से अपने भाषण के दौरान उन्होंने इसके लिए नीतियों में बदलाव की घोषणा भी की थी. महिलाओं को स्थायी कमिशन देने के मुद्दे पर राहुल गांधी के ट्वीट में सरकार के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है.”