राहुल गाँधी के साथ 11 नेताओं को श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस भेजा गया

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हर बात का सबूत मांगने वाले कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कश्मीर मुद्दे का भी जमकर विरोध किया और फिर सरकार से वहां के सामान्य हालातो का सबूत भी माँगा. सरकार ने ऐलान भी किया था की कश्मीर में अब हालात सामान्य हो रहे और धीरे धीरे फ़ोन सेवओं में भी ढील दी जा रही है, वहां के स्कूलों को भी खोल दिया गया है. लेकिन बेचेन राहुल गाँधी को सरकार कि बातों का विश्वास नही है. जम्मू कश्मीर ने विपक्षीय नेताओं को वह न आने कि सलाह दी थी. प्रसाशन ने कहा था कि नेता यहाँ न आये.

प्रसाशन ने ट्वीट करके कहा था कि विपक्षीय नेताओं के आने से असुविधा होगी. हम लोगों को आतंकियों से बचाने में लगे हैं. प्रशासन ने कहा कि नेता उन प्रतिबंधों का भी उल्लंघन कर रहे होंगे, जो अभी भी कई क्षेत्रों में हैं. वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति, व्यवस्था बनाए रखने और नुकसान को रोकने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. इसके बाद भी राहुल गाँधी समेत 11 नेताओं के प्रतिनिधिमंडल शनिवार को कश्मीर पहुंचा.

सुरक्षा हालातों के चलते नेताओं को एयरपोर्ट से बाहर निकलने ही नही दिया. कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के अलावा इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद,आनंद शर्मा, केसी वेणुगोपाल, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, डीएमके नेता तिरुची शिवा, शरद यादव, टीएमसी के नेता दिनेश त्रिवेदी, एनसीपी नेता माजिद मेमन और सीपीआई महासचिव डी राजा शामिल हैं. एएनआई के मुताबिक इन सभी नेताओं को दिल्ली वापस भेज दिया गया है. इसको लेकर वहां काफी हंगामा भी हुआ. प्रतिनिधि दल में शामिल माजिद मेमन ने कहा कि हम सरकार का विरोध करने नहीं गए थे. हम सरकार के सहयोग के लिए ही गए थे. इससे साफ़ है कि अगर आप सरकार का विरोध नही कर रहे थे तो वहां जाने के लिए इतने बेचेन क्यों थे. क्या उनका वहा जाने का मकसद वहा के लोगों और अलगाववादियों को इस मुद्दे को लेकर भड़काने का था.